अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने पाकिस्तान को छह अरब डॉलर का राहत पैकेज देते वक्त पाक अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कई कड़ी शर्तें रखीं, लेकिन फिलहाल इमरान सरकार किसी भी शर्त पर खरी उतरती दिखाई नहीं दे रही है।
एक तरफ पाकिस्तान सरकार का खर्च लगातार बढ़ रहा है तो दूसरी तरफ उसकी आय (राजस्व) में गिरावट जारी है। पाकिस्तान ने जुलाई महीने में शुरू हुए नए वित्तीय वर्ष में सरकारी राजस्व 40 फीसदी तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
यदि पाक सरकार इस तिमाही में आईएमएफ के लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पाती है तो टैक्स बढ़ाने के लिए एक नया मिनी बजट लाना पड़ेगा ताकि आईएमएफ की समीक्षा में पास हुआ जा सके। यह असंभव लक्ष्य है। ऐसे में राजस्व लक्ष्य हासिल न कर पाने पर आईएमएफ का 6 अरब डॉलर का पैकेज खतरे में पड़ सकता है।
इमरान सरकार ने पिछले साल के मुकाबले 20 फीसदी ज्यादा खर्च किया लेकिन राजस्व में इस साल 6 फीसदी की गिरावट आई है। पाक वित्त मंत्रालय के मुताबिक, कर्ज और रक्षा बजट पर ही 3.23 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए जो सरकारी राजस्व का कुल 80 फीसदी है। उधर, सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के दाम भी बढ़ा दिए। इससे लगता है कि इमरान सरकार पाकिस्तानियों का भरोसा जीतने में सफल नहीं हो पा रही है।