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France: क्या सोशल मीडिया से भड़की फ्रांस में हिंसा, सरकार ने इनके खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी क्यों दी?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Mon, 03 Jul 2023 07:56 PM IST

सार

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने टिकटॉक, स्नैपचैट और अन्य प्लेटफार्मों को दंगा भड़काने के लिए दोषी ठहराया है। राष्ट्रपति ने हिंसा के लिए वीडियो गेम की भी आलोचना की। वहीं गृह मंत्री दार्मैनिन ने कहा कि यदि कोई भी सोशल नेटवर्क कानून का सम्मान नहीं करते हैं, तो देश सभी आवश्यक कदम उठाएगा।
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फ्रांस हिंसा - फोटो : AMAR UJALA
फ्रांस में 17 वर्षीय किशोर नाइल की मौत के बाद देश में हुई हिंसक घटनाएं छठे दिन भी जारी रहीं। हालांकि, सरकार ने दावा किया है कि अब हिंसा कम होती दिख रही है। गृह मंत्रालय ने कहा कि पुलिस ने रविवार (दो जुलाई) को देशभर में 78 गिरफ्तारियां कीं। देश में भड़की हिंसा के बाद सोशल मीडिया कंपनियां सवालों के घेरे में हैं। दरअसल, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने सोशल मीडिया साइट्स पर दंगे भड़काने का आरोप लगाया है।  

आखिर फ्रांसीसी सरकार ने सोशल मीडिया पर क्या आरोप लगाए हैं? सरकार ने ये आरोप क्यों लगाए? क्या सरकार इनके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है? सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों ने क्या प्रतिक्रिया दी? फ्रांस में अभी क्या हालात हैं? आइये जानते हैं…
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फ्रांस हिंसा - फोटो : AMAR UJALA
फ्रांस में 17 वर्षीय किशोर नाइल की मौत के बाद देश में हुई हिंसक घटनाएं छठे दिन भी जारी रहीं। हालांकि, सरकार ने दावा किया है कि अब हिंसा कम होती दिख रही है। गृह मंत्रालय ने कहा कि पुलिस ने रविवार (दो जुलाई) को देशभर में 78 गिरफ्तारियां कीं। देश में भड़की हिंसा के बाद सोशल मीडिया कंपनियां सवालों के घेरे में हैं। दरअसल, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने सोशल मीडिया साइट्स पर दंगे भड़काने का आरोप लगाया है।  

आखिर फ्रांसीसी सरकार ने सोशल मीडिया पर क्या आरोप लगाए हैं? सरकार ने ये आरोप क्यों लगाए? क्या सरकार इनके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है? सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों ने क्या प्रतिक्रिया दी? फ्रांस में अभी क्या हालात हैं? आइये जानते हैं…

फ्रांस में विरोध-प्रदर्शन। - फोटो : सोशल मीडिया
पहले जानते हैं फ्रांस में हुआ क्या है?
राजधानी पेरिस के उपनगर नानतेरे में मंगलवार को ट्रैफिक नियम तोड़ने के आरोप में ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने एक किशोर नाइल को गोली मार दी। इससे उसकी मौत हो गई। नाइल को पॉइंट ब्लैंक रेंज से छाती में गोली मारी गई। पहले पुलिस ने दावा किया कि किशोर ने पुलिसकर्मियों पर गाड़ी चढ़ाने की कोशिश की, जिस पर पुलिस ने गोली चलाई। हालांकि, घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस का दावा गलत निकला। इसके बाद लोगों का गुस्सा भड़क गया और देश हिंसा की आग में झुलसने लगा। 

Emanuel Macron - फोटो : PTI
फ्रांसीसी सरकार ने सोशल मीडिया पर क्या आरोप लगाए हैं? 
फ्रांस में हो रही हिंसक घटनाओं के बाद सोशल मीडिया कंपनियां एक बार फिर विवादों में हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने टिकटॉक, स्नैपचैट और अन्य प्लेटफार्मों को दंगा भड़काने का जिम्मेदार ठहराया है। राष्ट्रपति ने दंगों के लिए वीडियो गेम की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार अति संवेदनशील सामग्री को हटाने और उन उपयोगकर्ताओं की पहचान करने के लिए सोशल मीडिया साइटों के साथ काम करेगी।  

मैक्रों - फोटो : Twitter@
सरकार ने हिंसा को बढ़ावा देने के आरोप क्यों लगाए?
एक फ्रांसीसी अधिकारी ने सोशल मीडिया पर नाइल पर गोली चलाने वाले पुलिस अधिकारी के नाम और पते की जानकारी वायरल होने का उदाहरण दिया। अधिकारी के मुताबिक, एक जेल अधिकारी ने भी अपना पहचान पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होते देखा है।  

अधिकारी ने कहा कि हिंसा भड़काने वाली सामग्री को हटाने की प्रक्रिया में तेजी लाने के उद्देश्य से सरकार और स्नैपचैट और ट्विटर सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के बीच बातचीत शुरू हो गई है। फ्रांसीसी सरकार उन लोगों की पहचान करने पर भी जोर दे रही है जो हिंसा को भड़का रहे हैं।

देश के गृह मंत्री दार्मैनिन ने सोशल नेटवर्क के साथ एक बैठक में चेतावनी दी थी कि वो हिंसा भड़काने के लिए चैनल के इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दे सकते। दार्मैनिन ने कहा कि फ्रांसीसी अधिकारी सोशल मीडिया कंपनियों को जितना संभव हो उतनी अधिक जानकारी प्रदान करेंगे, ताकि बदले में उन्हें हिंसा भड़काने वाले लोगों की पहचान मिल सके। 

उन्होंने कहा कि अधिकारी हर उस व्यक्ति पर नजर रखेंगे जो इन सोशल नेटवर्क का उपयोग हिंसा भड़काने के लिए करता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई भी सोशल नेटवर्क कानून का सम्मान नहीं करते हैं, तो देश सभी आवश्यक कदम उठाएगा।

social media - फोटो : istock
क्या सरकार इनके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है, कानून क्या कहता है?
फ्रांस में साइबर अपराध के खिलाफ एक कानून है। दुष्कर्म और हत्या जैसे अपराधों की ऑनलाइन धमकियों के साथ-साथ ऑनलाइन मानहानि पर भी मुकदमा चलाया जा सकता है। 2020 में, देश की संसद ने एक विधेयक को मंजूरी दी जिसके कारण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और सर्च इंजनों को 24 घंटे के भीतर निषिद्ध सामग्री को हटाना होता है। एक साल बाद एक फ्रांसीसी अदालत ने सोशल पोस्ट में इस्लाम की आलोचना करने वाले एक किशोर को परेशान करने और धमकी देने के आरोप में 13 में से 11 लोगों को दोषी ठहराया।

Snapchat - फोटो : Istock
आरोपों पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों ने क्या प्रतिक्रिया दी?
हिंसा को बढ़ावा देने के आरोपों के बाद सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स ने भी प्रतिक्रिया दी है। स्नैपचैट के प्रवक्ता राचेल राक्यूसेन ने कहा कि घटना के दिन यानी मंगलवार से इसने फ्रांस में दंगों से संबंधित सामग्री का पता लगाने और उस पर कार्रवाई करने के लिए अपना नियामन बढ़ा दिया है।

रैकुसेन ने कहा, 'हिंसा के विनाशकारी परिणाम होते हैं और हम स्नैपचैट के किसी भी हिस्से पर नफरत या हिंसक कृत्य को बढ़ावा देने या उकसाने वाली सामग्री के प्रति शून्य सहिष्णुता रखते हैं। हम इस प्रकार की सामग्री को सक्रिय रूप से नियामन करते हैं और जब हमें यह मिलती है, तो हम इसे हटा देते हैं और उचित कार्रवाई करते हैं।'

फ्रांस में किशोर नाइल की हत्या के बाद हिंसा - फोटो : SOCIAL MEDIA
फ्रांस में अभी क्या हालात हैं?
इस बीच सरकार ने दावा किया है कि नाइल की हत्या के लगभग एक सप्ताह बाद फ्रांस में हिंसा कम होती दिख रही है। गृह मंत्रालय ने कहा कि पुलिस ने रविवार को देशभर में 78 गिरफ्तारियां कीं जिससे कुल संख्या 3,000 से अधिक हो गई है। हिंसा में सैकड़ों पुलिस और अग्निशमनकर्मी घायल हुए हैं।

उधर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने रविवार रात एक विशेष सुरक्षा बैठक की। सोमवार को संसद के दोनों सदनों के प्रमुखों के साथ और मंगलवार को हिंसा प्रभावित 220 कस्बों और शहरों के मेयरों के साथ उनकी बैठक होनी है। एक अधिकारी ने कहा कि मैक्रॉन उन कारणों का भी मूल्यांकन शुरू करना चाहते हैं जिनके कारण अशांति हुई। देश के हालात को देखते हुए मैक्रॉन ने जर्मनी की पहली राजकीय यात्रा को भी रद्द कर दिया, जो रविवार शाम को शुरू होने वाली थी।

आतिशबाजी पर प्रतिबंध
हिंसा को रोकने करने के लिए फ्रांस में रात नौ बजे के बाद बसों और ऑटो का चलना बंद कर दिया गया है। मार्सिले शहर में शाम छह बजे से सभी शहरी परिवहन बंद कर दिए गए हैं। इसके साथ ही देश में बड़े पटाखों की बिक्री पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।
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