फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Trump Tariffs: 'संविधान मानिए, एकतरफा नहीं चल सकता टैरिफ', राष्ट्रपति ट्रंप को नील कात्याल की खुली चुनौती

Sun, 22 Feb 2026 11:07 AM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

नील कात्याल का कहना है कि अगर टैरिफ वाकई अच्छे और जरूरी हैं तो सरकार को कांग्रेस को मनाकर कानून के जरिए मंजूरी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान भी यही प्रक्रिया बताता है। इस विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा यही है कि क्या व्यापार घाटे को भुगतान संतुलन घाटा माना जा सकता है, जबकि आर्थिक और कानूनी विशेषज्ञ इसे अलग-अलग मानते हैं।
विज्ञापन
नील कात्याल, भारतीय-अमेरिकी वकील - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से लगाए गए नए वैश्विक टैरिफ (आयात शुल्क) को लेकर बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। मशहूर भारतीय-अमेरिकी वकील नील कात्याल ने ट्रंप के फैसले पर गंभीर सवाल उठाए हैं और कहा है कि अगर राष्ट्रपति को इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाना है तो उन्हें संविधान के अनुसार कांग्रेस से मंजूरी लेनी चाहिए, न कि सिर्फ अपने अधिकारों का इस्तेमाल करके ऐसा करना चाहिए।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें - US: 'छह जनवरी के बाद ट्रंप के खाते बंद किए', जेपीमॉर्गन बैंक का कोर्ट में कबूलनामा; समझें पूरा विवाद

विज्ञापन


'ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 का आधार कमजोर'
कात्याल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ट्रंप जिस कानून, ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122, का सहारा लेकर 15% तक का वैश्विक टैरिफ लगा रहे हैं, वह कानूनी तौर पर कमजोर आधार है। उन्होंने बताया कि पहले इसी मामले में अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि यह धारा यहां लागू ही नहीं होती, क्योंकि व्यापार घाटा और भुगतान संतुलन घाटा दोनों अलग चीजें हैं। अब सरकार उसी धारा का इस्तेमाल कर रही है, जो खुद उसकी पहले की दलील से टकराता है।
 

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को किया रद्द
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पुराने व्यापक टैरिफ को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने साफ कहा था कि टैक्स लगाने का अधिकार मुख्य रूप से कांग्रेस के पास होता है और राष्ट्रपति ने आईईईपीए कानून का गलत इस्तेमाल किया था। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने तुरंत नया रास्ता अपनाते हुए पहले 10% का वैश्विक टैरिफ लगाया, जिसे बाद में बढ़ाकर 15% कर दिया गया। ट्रंप ने इसे 'अस्थायी आयात शुल्क' बताया और कहा कि यह अमेरिका के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी है।

कात्याल का कहना है कि अगर टैरिफ वाकई अच्छे और जरूरी हैं तो सरकार को कांग्रेस को मनाकर कानून के जरिए मंजूरी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान भी यही प्रक्रिया बताता है। इस विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा यही है कि क्या व्यापार घाटे को भुगतान संतुलन घाटा माना जा सकता है - जबकि आर्थिक और कानूनी विशेषज्ञ इसे अलग-अलग मानते हैं।
विज्ञापन


IMF की पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने किया कात्याल का समर्थन
इस बहस को और वजन तब मिला जब अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्री और आईएमएफ की पूर्व वरिष्ठ अधिकारी गीता गोपीनाथ ने भी कात्याल की बात का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कात्याल 'इंटरनेशनल इकॉनॉमिक्स की बुनियादी बात' समझा रहे हैं और सरकार का तर्क आर्थिक दृष्टि से भी कमजोर लगता है।
 

यह भी पढ़ें - Pakistan Airstrike: अफगानिस्तान पर पाकिस्तान का हवाई हमला, दावा- TTP के सात आतंकी ठिकानों को बनाया निशाना

भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर पड़ सकता है असर
इस बीच, इस फैसले का असर भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी पड़ सकता है। अमेरिकी अधिकारी पहले ही कह चुके हैं कि भारत समेत सभी देशों पर यह नया टैरिफ लागू होगा, जब तक कोई नया समझौता नहीं हो जाता। भारत सरकार ने कहा है कि वह इस पूरे घटनाक्रम का अध्ययन कर रही है और उसके असर का आकलन किया जा रहा है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें