दुनियाभर में आइस बकेट चैलेंज को लोकप्रिय बनाने वाले पीट फ्रेट्स का सोमवार को 34 साल की उम्र में निधन हो गया। फ्रेट्स को न्यूरोलॉजिकल डिजीज- एएलएस (एम्योट्रोफिक लेटरल स्लेरोसिस) बीमारी थी, इसे लू गेहरिज डिजीज के नाम से भी जाना जाता है।
फ्रेट्स को 27 वर्ष की उम्र में इस बीमारी के बारे में पता चला। इसके बाद फ्रेट्स ने 2014 में आइस बकेट चैलेंज शुरू किया। इसके तहत लोगों को अपने ऊपर बर्फीले पानी को बाल्टी से उलेड़ना होता था और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करना होता था। इस चैलेंज के पीछे का मकसद न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए चैरिटी इकट्ठा करना था।
फ्रेट्स से प्रेरणा लेते हुए इस चैलेंज को दुनियाभर के लोकप्रिय लोगों ने किया। इनमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से लेकर माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर बिल गेट्स और हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज तक शामिल थे। बालीवुड की कई हस्तियों ने भी इस चैलेंज को किया था, जिनमें अक्षय कुमार भी शामिल थे।
परिवार के बीच शांति में हुआ निधन
फ्रेट्स के परिवार ने बताया कि सात साल तक एएलएस से जूझने के बाद सोमवार को पीट जिंदगी की जंग हार गया। उनकी मौत परिवार के बीच शांति से हुई। वे हीरो की तरह लंबे समय तक अपनी बीमारी से लड़े। परिवार ने बताया कि पीट ने कभी भी अपनी बीमारी को लेकर कोई शिकायत नहीं की, बल्कि उन्होंने इसे दूसरे पीड़ितों और उनके परिवारों को उम्मीद और हिम्मत देने के मौके के तौर पर देखा।
आइस बकेट चैलेंज से जुटे थे 1418 करोड़ रुपये
एएलएस एसोसिएशन के मुताबिक, 2014 में आइस बकेट चैलेंज में दुनियाभर के करीब 1.7 करोड़ लोगों ने भाग लिया था। दुनियाभर से करीब 1418 करोड़ रुपये (20 करोड़ डॉलर) इस चैलेंज के माध्यम से जुटाए गए थे। इन पैसों का प्रयोग न्यूरोडीजेनेरेटिव डिजीज पर शोध के लिए किया जा रहा है। इन बीमारियों में आमतौर पर मरीजों की मांसपेशियां कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे उनके चलने फिरने पर असर पड़ता है। दुनिया में अभी तक एएलएस का कोई इलाज नहीं ढूंढा जा सका है।