ये सिर्फ एक खबर नहीं लगती। ये कोई फिल्मी कहानी जैसा मामला है। दूर देश से आया एक महत्वाकांक्षी परिवार एक ऐसे देश में गहरे तक पैठ बना लेता है, जहां लोकतंत्र अपनी जड़ें जमा ही रहा था। ये परिवार कल्पना से परे जाकर दौलत और रुतबा हासिल करता है। उस पर राज्य को बंधक बनाने तक के आरोप लगते हैं और तभी वो रातों रात अचानक गायब हो जाता है, उन तमाम लोगों को मुश्किलों के घेरे में छोड़कर जो उसके मददगार माने जाते रहे हैं।
ऐसे तमाम लोग जो इस परिवार को लेकर शुरुआत से आगाह करते रहे थे। वो भी हैरत में पड़ जाते हैं कि कोई इतने लंबे समय तक इतना कुछ करते हुए भी बचकर निकल कैसे सकता है? हैरान और अपमानित महसूस कर रहे दक्षिण अफ्रीका के लोग अब तक गुप्ता परिवार के किए को हजम करने की कोशिश में हैं। वो इस आकलन में जुटे हैं कि इस परिवार ने देश के संस्थानों, नेताओं और लोकतंत्र को कितना नुकसान पहुंचाया है।
राजनीतिक विश्लेषक प्रिंस मशेल की राय है, "नुकसान की भरपाई हो सकती है" लेकिन तभी जबकि यहां के अधिकारी गुप्ता परिवार के साथ कथित तौर पर षडयंत्र करने वाले लोगों के खिलाफ तेजी और आक्रामक तरीके से काम करें। वो कहते हैं, "समाज को नजर आना चाहिए कि लोग जेल जा रहे हैं। अगर आप ऐसा करते हैं तो आप संदेश देते हैं कि जो गुप्ता परिवार ने किया, आप भी वैसा करते हैं तो उसके नतीजे भुगतने होंगे।"
हट गया रक्षा कवच
ये बीते महीने की बात है। दक्षिण अफ्रीका पुलिस की हॉक्स यूनिट सूरज निकलने के पहले जोहानिसबर्ग स्थित गुप्ता परिवार के आलीशान परिसर पहुंची। अधिकारी गिरफ्तारी करने के इरादे में थे और देश के तमाम लोगों के लिए हैरान करने वाली बात थी। ये परिवार कई बरसों तक कानून की पहुंच से महफूज दिखता था। इस परिवार पर अधिकारियों, ईमेल लीक और नेताओं की ओर से भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए लेकिन तत्कालीन राष्ट्रपति जैकब जूमा के साथ दोस्ती इनका रक्षा कवच नजर आती रही।
गुप्ता भाइयों पर मंत्रियों की नियुक्तियों और अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए सरकारी ठेकों से धन बनाने के आरोप लगे। उन्होंने राष्ट्रपति के बेटे डूडूजाने को काम हासिल करने के लिए रखा और लगातार इस बात से इनकार करते रहे कि वो कुछ गलत कर रहे हैं। लेकिन 14 फरवरी को सबकुछ नाटकीय अंदाज में बदल गया। राष्ट्रपति जूमा ने इस्तीफे का ऐलान किया और कुछ ही घंटों में पुलिस छापा डालने पहुंच गई। पुलिस को जानकारी हुई तीनों गुप्ता भाई विदेश चले गए हैं। गुप्ता परिवार में तीन भाई हैं। अतुल, राजेश और अजय।
कानूनी अभियान चलाने वाले मार्क हेवुड का सेक्शन 27 उन संगठनों में से एक है, जो दक्षिण अफ्रीका के अधिकारियों से बरसों से गुप्ता परिवार के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। मार्क हेवुड कहते हैं, "मुझे लगता है कि वो प्रत्यर्पण की स्थिति में ही वापस आएंगे।" उन्होंने कहा, "ये एक जीत है... जो कुछ हो रहा था, उसे सामने लाने के लिए हमने कई मोर्चे खोले थे। राज्य को 'बंधक' बनाए जाने की स्थिति आगे जारी न रहे, हमने लगभग ये स्थिति ला दी। हमने अधिकारियों पर दबाव बनाया कि जो उन्हें जो शुरुआत में करना चाहिए थे, वो वैसा करें।"