दुनिया को कोरोना वायरस की सच्चाई और इसकी उत्पत्ति के बारे में पता चल सकता है। अब दो हफ्तों के क्वारंटीन के बाद असली काम शुरू होने जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक टीम गुरुवार को कोरोना वायरस के अस्तित्व में आने के बाद इसकी उत्पत्ति के बारे में सबूत जुटाने के लिए चीन के वुहान शहर में दौरा करने पहुंची।
इस यात्रा को पूरी तरह से गोपनीय रखा गया है और यात्रा का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसके अलावा इस बात की भी जानकारी नहीं है कि चीन ने शोधकर्ताओं को उस विशेष जगह का दौरा करने के लिए कितनी अनुमति दी है और कितने ऐसे लोग हैं, जिसनें डब्ल्यूएचओ की टीम बात कर सकती है।
चीन का दौरा क्यों कर रही है टीम?
विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम इसलिए चीन का दौरा कर रही है क्योंकि कोरोना वायरस का सबसे पहला मामला वुहान शहर में ही आया था। शोधकर्ताओं की इस टीम को लगता है कि वुहान में जांच-पड़ताल करने से कोरोना वायरस की उत्पत्ति के बारे में पता चल सकता है और इस तरह की महामारी से बचने के लिए उपाय किए जा सकते हैं।
दुनियाभर के शोधकर्ता चीन की सीफूड बाजार और वुहान अस्पताल के रिकॉर्ड के सैंपल की जांच करने के लिए उत्सुक हैं। ऐसा माना जा रहा है कि विश्व स्वास्थय संगठन की यह टीम इस बाजार और उन जगहों का दौरा करेगा, जहां कोरोना के मामले पाए गए।
इसके अलावा यह टीम चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी का भी दौरा कर सकती है। यह लैब 2003 में सार्स महामारी के बाद बनाई गई थी, जो कि चमगादड़ कोरोना वायरस के आनुवांशिक अनुक्रमों का एक व्यापक संग्रह बनाए रखता है। इसके अलावा शोधकर्ताओं की यह टीम चीन की सीडीसी की स्थानीय शाखा का भी दौरा कर सकती है।
टीम को किन बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है?
यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या चीन शोधकर्ताओं को देखने और करने की इजाजत देगा। एक मीडिया शोध के बाद यह पता चलता है कि चीनी सरकार ने कोरोना से संबंधित खबरों और शोध को नियंत्रित किया था और शोधकर्ताओं को मीडिया से बात करने की इतनी अनुमति नहीं दी गई थी।
आम जनता को इसका जवाब कब मिलेगा?
कोरोना वायरस की उत्पत्ति के बारे में जानने के लिए अभी कई सालों की समय लग सकता है। इबोला और सार्स की उत्पत्ति जानने में दस साल का समय लगा था। लेकिन अगर कोरोना वायरस के बारे में यह जानकारी मिल जाए कि यह कहां से फैला था तो इस तरह की महामारियों से भविष्य में बचा जा सकता है।