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शुरुआती गलतियों से सीख लेकर चीन ने ऐसे पाया कोरोना वायरस पर काबू

अनिल पांडेय
Updated Fri, 13 Mar 2020 09:48 PM IST
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China CoronaVirus
चीन के वुहान से दुनियाभर में पहुंचा कोरोना वायरस महाभयंकर रूप ले चुका है। वैश्विक महामारी बन चुका यह संक्रमण अब तक 5000 से ज्यादा लोगों की जान ले चुका है और 1,39,356 लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं। केवल चीन में ही 80,955 संक्रमण के मामले सामने आए हैं, जिनमें से 62,888 रोगी अब स्वस्थ हो चुके हैं।

शुरुआत में चीन भी इस महामारी की भयंकरता को भांप नहीं पाया था। लेकिन जैसे ही इस महाप्रकोप को उसने समझा, इसके निराकरण और नियंत्रण में जुट गया। आइए, आपको बताते हैं कि कैसे चीन ने इस महामारी से निपटने की तैयारी की और सफल हो रहा है।


कोरोना वायरस से निपटने के चीन के तरीकों की प्रशंसा विश्व स्वास्थ्य संगठन भी कर चुका है। हालांकि शुरुआत में इसमें कुप्रबंधन भी दिखा था।

पाबंदी का डंडा
आठ दिसंबर 2019 को वुहान में कोरोना वायरस का पहला मामला सामने आया था। लेकिन इस पर कार्रवाई करने में 14 जनवरी तक का समय लग गया। चीन के एक नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर ली वेनलियांग ने सबसे पहले कहा था कि वुहान में सार्स जैसी एक बीमारी फैल रही है। लेकिन उनको चुप रहने के लिए कहा गया और सरकार ने अफवाह फैलाने के आरोप में उन्हें दंडित भी किया। कुछ ही दिनों बाद ली की बीमारी की वजह से मौत हो गई थी।

चीन की सरकार ने शुरुआत में इस मामले को दबाने की भरसक कोशिश की। सरकारी प्रचार प्रणाली ने भी इस मामले को गलत साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। लेकिन जनसामान्य का गुस्सा बढ़ता गया। चीन की सरकार और प्रभावित क्षेत्रों के प्रशासन ने ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों ही तरीकों से कोरोना पर चर्चा करने पर पाबंदी लगा दी थी।

जनवरी 2020 में 18 लोगों को सार्स जैसी बीमारी फैलने की अफवाह उड़ाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि जल्द ही यह साबित हो गया कि यह अफवाह नहीं सच है।
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China CoronaVirus
चीन के वुहान से दुनियाभर में पहुंचा कोरोना वायरस महाभयंकर रूप ले चुका है। वैश्विक महामारी बन चुका यह संक्रमण अब तक 5000 से ज्यादा लोगों की जान ले चुका है और 1,39,356 लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं। केवल चीन में ही 80,955 संक्रमण के मामले सामने आए हैं, जिनमें से 62,888 रोगी अब स्वस्थ हो चुके हैं।

शुरुआत में चीन भी इस महामारी की भयंकरता को भांप नहीं पाया था। लेकिन जैसे ही इस महाप्रकोप को उसने समझा, इसके निराकरण और नियंत्रण में जुट गया। आइए, आपको बताते हैं कि कैसे चीन ने इस महामारी से निपटने की तैयारी की और सफल हो रहा है।

कोरोना वायरस से निपटने के चीन के तरीकों की प्रशंसा विश्व स्वास्थ्य संगठन भी कर चुका है। हालांकि शुरुआत में इसमें कुप्रबंधन भी दिखा था।

पाबंदी का डंडा
आठ दिसंबर 2019 को वुहान में कोरोना वायरस का पहला मामला सामने आया था। लेकिन इस पर कार्रवाई करने में 14 जनवरी तक का समय लग गया। चीन के एक नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर ली वेनलियांग ने सबसे पहले कहा था कि वुहान में सार्स जैसी एक बीमारी फैल रही है। लेकिन उनको चुप रहने के लिए कहा गया और सरकार ने अफवाह फैलाने के आरोप में उन्हें दंडित भी किया। कुछ ही दिनों बाद ली की बीमारी की वजह से मौत हो गई थी।

चीन की सरकार ने शुरुआत में इस मामले को दबाने की भरसक कोशिश की। सरकारी प्रचार प्रणाली ने भी इस मामले को गलत साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। लेकिन जनसामान्य का गुस्सा बढ़ता गया। चीन की सरकार और प्रभावित क्षेत्रों के प्रशासन ने ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों ही तरीकों से कोरोना पर चर्चा करने पर पाबंदी लगा दी थी।

जनवरी 2020 में 18 लोगों को सार्स जैसी बीमारी फैलने की अफवाह उड़ाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि जल्द ही यह साबित हो गया कि यह अफवाह नहीं सच है।

तकनीक का सहारा
चीन के टेलीकॉम और मोबाइल ऑपरेटर्स ने पाबंदियां लगाने में सरकार की पूरी मदद की थी। स्वास्थ्य कोड नाम की प्रणाली विकसित की गई। इसमें तीन रंगों के कोड उपयोग किए जा रहे थे।
सभी लोगों को उनके द्वारा की गई यात्रा के अनुसार रंगो के कोड दिए जा रहे थे।

चीन की कई कंपनियों ने फेशियल रिकग्निशन (चेहरा पहचानने की प्रणाली) का उपयोग शुरू कर दिया था, जिससे वो सार्वजनिक स्थल पर ऐसे लोगों की पहचान करते थे, जिन्होंने मास्क नहीं पहने थे या फिर सुरक्षात्मक उपाय नहीं लिए थे।

सोशल मीडिया पर ऐसे लोगों की पहचान की जा रही थी, जो संक्रमित थे या फिर संक्रमण के बचाव के तरीकों का पालन नहीं कर रहे थे। कई शहरों में तो संक्रमितों की पहचान बताने वालों को ईनाम भी दिया जा रहा था।

घट रहे हैं मामले
चीन ने किस तेजी से इस मामले पर काबू पाया उसका पता इसी से चलता है कि मार्च में केवल 12 ही नए संक्रमित लोग मिले। येल विश्वविद्यालय के सोशल तथा प्राकृतिक विज्ञान विभाग के प्रोफेसर निकोलस किस्तारिक ने चीन के कोरोना वायरस से निपटने के तरीके को सोशल न्यूक्लियर वेपन (सामाजिक परमाणु हथियार) की संज्ञा दी है।

चीन की सख्ती का फायदा इस महामारी से निपटने में असरकारक साबित हुआ। सभी दफ्तरों और रहवासी इलाकों में लोगों का तापमान लिया जा रहा था। शहर तथा क्षेत्र से आने-जाने वालों का रिकॉर्ड रखा जा रहा था। हर घर से केवल एक ही व्यक्ति को बाहर निकलने की अनुमति थी। सभी विद्यालय बंद कर दिए गए और ऑफलाइन कक्षाएं चलाई गईं। घरों में भोजन तथा अस्पतालों में दवाई पहुंचाने के लिए केंद्रीकृत सुविधाएं शुरू की गईं।
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