सार
पश्चिम एशिया में एक महीने से जारी संघर्ष का असर वैश्विक व्यापार पर बड़ा संकट गहराता दिख रहा है। ईरान के होर्मुज में दबदबे के बाद अब हूती विद्रोही बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य और लाल सागर में सक्रिय हो गए हैं। इन अहम समुद्री रास्तों पर बढ़ते खतरे से तेल, गैस और माल ढुलाई प्रभावित हो सकती है, जिससे पूरी दुनिया की सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अब सीधे उन समुद्री गलियारों तक पहुंचता दिख रहा है, जिन पर वैश्विक व्यापार टिका हुआ है। बीबीसी, और एसएंडपी ग्लोबल के विश्लेषण के मुताबिक लाल सागर और उसके दक्षिणी छोर पर स्थित बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य जहां से एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच बड़े पैमाने पर तेल, गैस और कंटेनर शिपमेंट गुजरते हैं,अब हूती विद्रोहियों की संभावित कार्रवाई के केंद्र में हैं। इस रणनीतिक चोकपॉइंट पर किसी भी तरह की अस्थिरता का मतलब है वैश्विक सप्लाई चेन में तत्काल झटका।
स्थिति इसलिए और गंभीर हो जाती है क्योंकि ईरान पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य पर दबाव बनाकर ऊर्जा आपूर्ति को जोखिम में डाल चुका है। वैश्विक ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि अगर बाब-अल-मंदेब और होर्मुज दुनिया के दो सबसे अहम समुद्री मार्ग एक साथ अस्थिर होते हैं तो यह वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार के लिए अभूतपूर्व संकट पैदा कर सकता है। बाब-अल- मंदेब को वैश्विक व्यापार की संकरी लेकिन निर्णायक कड़ी माना जाता है।
पहले भी बना चुके हैं निशाना
बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ता है। रॉयटर्स और क्षेत्रीय सुरक्षा रिपोर्ट्स के अनुसार हूती पहले भी सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के तेल प्रतिष्ठानों और सैन्य ठिकानों को निशाना बना चुके हैं। ऐसे हमले यदि दोबारा होते हैं तो इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो सकती हैं।
हूती रणनीति- समुद्र के रास्ते वैश्विक दबाव
बीबीसी और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषकों के मुताबिक हूतियों की सबसे बड़ी ताकत यही है कि वे बाब-अल-मंदेब के पास स्थित हैं और वहां से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बना सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार आंकड़ों के अनुसार यह मार्ग स्वेज नहर के साथ मिलकर एशिया और यूरोप के बीच सबसे तेज समुद्री कनेक्शन बनाता है और रोजाना बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, एलएनजी व कंटेनर कार्गो इसी रास्ते से गुजरता है।