पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर दुनिया भर की नजरें वॉशिंगटन और तेहरान पर टिकी हुई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ कहा है कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन अमेरिका अभी मौजूदा प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं है। व्हाइट हाउस में हुई अहम कैबिनेट बैठक में ट्रंप ने संकेत दिया कि बातचीत जारी है, लेकिन अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई का रास्ता भी अपना सकता है। इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य, तेल आपूर्ति और युद्धविराम को लेकर वैश्विक चिंता और बढ़ गई है।
मुद्दा |
अमेरिका का रुख |
ईरान का दावा |
|---|---|---|
नौसैनिक नाकेबंदी |
हटाने से इनकार |
हटाने की बात |
सैन्य वापसी |
कोई पुष्टि नहीं |
खाड़ी से हटने का दावा |
होर्मुज मार्ग |
निगरानी जारी |
व्यापार सामान्य करने की बात |
समझौता मसौदा |
फर्जी बताया |
प्रारंभिक सहमति का दावा |
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रूबियो ने बैठक में क्या-क्या कहा?
अमेरिकी विदेश मंत्री रूबिय ने माना कि बातचीत में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन अंतिम समझौते तक पहुंचना अभी बाकी है। उन्होंने कहा कि अगले कुछ घंटे और दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे। रूबियो ने यह भी साफ किया कि अमेरिका किसी भी अधूरे या कमजोर समझौते के पक्ष में नहीं है।
रूबियो की बड़ी बातें पॉइंट्स में-
होर्मुज जलडमरूमध्य इतना अहम क्यों है?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। यहां तनाव बढ़ने का सीधा असर तेल कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। यही कारण है कि अमेरिका और ईरान के बीच हर बयान का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर तुरंत दिखाई देता है। हाल के तनाव के बाद तेल कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर क्या फंसा है मामला?
अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम का भंडार खत्म करे। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान के पास 60 फीसदी तक संवर्धित करीब 440.9 किलोग्राम यूरेनियम मौजूद है। अमेरिका इसे बड़ी सुरक्षा चुनौती मान रहा है। हालांकि ईरान ने अभी सार्वजनिक रूप से यूरेनियम छोड़ने की पुष्टि नहीं की है। बताया जा रहा है कि संभावित समझौते में ईरान को प्रतिबंधों में राहत देने के बदले यूरेनियम भंडार कम करने का प्रस्ताव शामिल हो सकता है।
इस्राइल और हिजबुल्ला का विवाद क्यों बना चिंता?
संभावित युद्धविराम समझौते में लेबनान और हिजबुल्ला का मुद्दा भी बड़ा विवाद बना हुआ है। ईरान चाहता है कि लेबनान को भी किसी भी संघर्षविराम समझौते में शामिल किया जाए। दूसरी ओर इस्राइल ने साफ कहा है कि वह अपनी सुरक्षा के खिलाफ किसी खतरे को बर्दाश्त नहीं करेगा। इस्राइली प्रधानमंत्री ने लेबनान में सैन्य अभियान और तेज करने की बात कही है। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।