कारी के अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने इन तथ्यों की अनदेखी करते हुए हंबनतोता के आधार पर डेट ट्रैप की कहानी फैलाई। इससे अफ्रीका में भी ये भय फैल गया कि चीन वहां संपत्तियां जब्त कर सकता है। 2018 में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बॉल्टन ने कहा था कि कर्ज ना चुका पाने वाली जाम्बिया की नेशनल पॉवर एंड यूटिलिटी कंपनी को चीन जब्त करने वाला है। ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने कहा कि चीन गरीब देशों को लुभा कर वहां विशाल परियोजनाएं बना रहा है, ताकि जब वे कर्ज ना चुका पाएं, तो उन संपत्तियों को वह जब्त कर ले। इन बातों के कारण कई अफ्रीकी देशों में तेजी से चीन विरोधी भावनाएं फैलीं।
लेकिन अब ब्रॉटिगम का कहना है कि ट्रंप का चीन कार्ड खेलना अमेरिकी चुनाव में एक प्रचार का एक मजबूत मुद्दा साबित हुआ। लेकिन इसका अफ्रीका में ज्यादा असर नहीं हुआ। वहां नई परियोजनाओं के लिए अनेक देश चीन से नए कर्ज लेते रहे। केन्या, जाम्बिया, नाइजीरिया सहित कुल 20 देशों ने 2018 और 2019 में चीन से नए कर्ज के लिए समझौते किए। तंजानिया अफ्रीका का अकेला बड़ा देश है, जिसने चीन से कर्ज नहीं लिया है।
अमेरिका के जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के इलियट स्कूल ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स में प्रोफेसर डेविड शिन ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा कि डेट ट्रैप डिप्लोमेसी की कहानी शुरू से कमजोर थी, क्योंकि यह बारीकियों को नजरअंदाज करके फैलाई गई थी। शिन के मुताबिक असल सूरत यह है कि आज अफ्रीका के कुल कर्ज में चीन का हिस्सा 20 फीसदी है। ये डेट ट्रैप डिप्लोमेसी नहीं है।
थिंक टैंक सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट में सीनियर फेलॉ और लाइबेरिया के पूर्व लोक निर्माण मंत्री डब्लू ग्लाइड मूर ने भी इस बात का समर्थन करते हुए कहा कि यह समझना जरूरी है कि आखिर इतने देशों ने चीन से कर्ज क्यों लिया है। इऩ देशों को व्यापारिक, द्विपक्षीय या बहुपक्षीय कर्ज मिलने में दिक्कत आती रही है, जबकि चीन ने आगे बढ़ कर उन्हें कर्ज दिया है। चीन पहले से ही कर्ज के जाल के आरोप का खंडन करता रहा है। उसका दावा रहा है कि चीन ने किसी देश में कोई संपत्ति जब्त नहीं की है। अब ताजा अध्ययन से उसके इस बचाव को बल मिलेगा। उसके लिए सबसे बड़ी बात यह है कि ये अध्ययन अमेरिका में हुआ, जहां से उस पर डेट ट्रैप डिप्लोमेसी के आरोप सबसे ज्यादा लगाए जाते रहे हैं।