अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने टेक्सास राज्य में जारी हालात को आधिकारिक तौर पर एक ‘बड़ी आपदा’ घोषित कर दी है, लेकिन राज्य में अभी भी सामान्य हालात नहीं है। इसके अलावा इस आपदा ने अमेरिका में लचर हो चुके इन्फ्रास्ट्रक्चर की समस्या को उभार कर सामने ला दिया है। अब आपदाओं से निपट सकने की देश की क्षमता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि अमेरिका की कमजोर हो गई क्षमता कोरोना महामारी के दौरान भी जाहिर हुई थी।
राष्ट्रपति बाइडन के आपदा घोषित करन से टेक्सास राज्य को संघीय सरकार से अधिक वित्तीय सहायता मिल पाएगी। इनमें घरों को पहुंचे नुकसान की मरम्मत, बीमाकृत संपत्तियों की कवरेज के लिए कम ब्याज पर ऋण और व्यक्तियों और कारोबार को सहायता के लिए अधिक धन शामिल हैं।
विंटर स्टॉर्म (बर्फीले तूफान) के कारण टेक्सास में कई दिन तक लाखों लोगों को बिना बिजली- पानी के रहना पड़ा। बिजली चली जाने के कारण मकानों की वॉर्मिंग (उन्हें गरम रखने की व्यवस्था) रुक गई, जिससे घरों के अंदर तापमान बेहद गिर गया। कई घरों में पानी जम गया। ऐसी खबरें भी मीडिया में आई हैं कि गरमी पाने के लिए लोगों ने अपने फर्नीचर तोड़ कर जलाए।
मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि टेक्सास का सरकारी बुनियादी ढांचा ऐसे तूफान को सहने और मौके पर पीड़ित लोगों को राहत के लिए तैयार नहीं था। इसका फायदा प्राइवेट कंपनियों ने उठाया। रूसी वेबसाइट रशिया टुडे में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक इन कंपनियों ने पानी और बिजली उपलब्ध कराने के बदले बहुत महंगी कीमत लोगों से वसूली। जिस सेवा का शुल्क 40 या 50 डॉलर होना चाहिए था, उसके बदले सैकड़ों डॉलर वसूले गए।
वेबसाइट एक्सियोस.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक अभी भी टेक्सास में टूटे पंप और फटी पाइपों के कारण पीने के पानी की समस्या है। कई जगहों पर दवाओं की भी कमी का सामना करना पड़ा है। इस रिपोर्ट के मुताबिक कुछ जगहों पर पानी का पूरा दबाव ना होने के कारण ऐसी आशंका है कि लोग दूषित जल पीने को मजबूर हुए हों। विंटर स्टॉर्म का असर टेक्सास के अलावा टेनेसी और मिसिसीपी राज्यों पर भी पड़ा। टेनेसी में दो लाख 60 हजार घरों में पानी की सप्लाई बाधित हुई। ऐसा पाइप फटने या पंपिंग स्टेशनों में रुकावट आ जाने के कारण हुआ।
कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि ताजा आपदा भले प्राकृतिक कारणों से आई हो, लेकिन उसके इतना भीषण होने की वजह अमेरिका में पुरानी पड़ गई ट्रांसमिशन लाइनें और उपकरण हैं। इनकी वजह से अमेरिका में बिजली जाने की समस्या लगातार बढ़ती गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 2007 से 2017 के बीच हर साल औसतन 3,188 मौकों पर अमेरिका में बिजली जाने की समस्या हुई। लगभग हर साल किसी ना किसी इलाके के लंबे समय तक अंधेरे में डूबे रहने की घटनाएं हाल के वर्षों में हुई हैँ।
एक दूसरी बड़ी समस्या इन्फ्रास्ट्रक्चर के बड़े पैमाने पर हुए निजीकरण को माना गया है। जरूरी क्षेत्रों से सरकारें हटती चली गई हैं, जबकि प्राइवेट कंपनियां सिर्फ मुनाफा देख कर काम करती हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर को अपडेट करते रहने पर वे पैसा लगाने से बचती रही हैं। 2015 में आई अमेरिका के ऊर्जा मंत्रालय की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि देश के लगभग 70 फीसदी ट्रांसफॉर्मर 25 से ज्यादा पुराने हैं। 60 प्रतिशत सर्किट ब्रेकर 30 से ज्यादा और 70 फीसदी ट्रांसमिशन लाइनें 25 साल से ज्यादा पुरानी हो चुकी हैं। इसलिए बिजली सप्लाई का सिस्टम ऐसा नहीं है, जो आपात काल के दबाव को झेल सके।
अमरिका में 72 प्रतिशत बिजली उत्पादन कंपनियां निजी क्षेत्र में हैं। दूसरी समस्या हर बड़े राज्य का अपना ग्रिड रखना है। इसका नतीजा यह हुआ कि जब टेक्सास में पॉवर सप्लाई सिस्टम फेल हुआ, तो दूसरे राज्यों से वहां बिजली पहुंचाने की व्यवस्था कर पाना संभव नहीं हुआ। जानकारों का कहना है कि टेक्सास की आपदा ने एक बार फिर अमेरिका की बुनियादी समस्याओं की तरफ ध्यान खींचा है। लेकिन इसका कोई समाधान निकल पाना आसान नहीं है, क्योंकि निजीकरण की नीति पर चलने के कारण सरकारों के हाथ बंधे हुए हैँ।