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हांगकांग ने चीन प्रत्यर्पण बिल वापस लिया

Wed, 04 Sep 2019 01:50 PM IST
शिल्पा ठाकुर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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नए प्रत्यर्पण कानून का विरोध करते लोग - फोटो : हांगकांग फ्री प्रेस
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हांगकांग में महीनों से विरोध प्रदर्शन करने वाले लोकतंत्र समर्थकों का संघर्ष आखिरकार कामियाब हो गया है। हांगकांग सरकार ने चीनी प्रत्यर्पण बिल को वापस ले लिया है।

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हांगकांग में महीनों से विरोध प्रदर्शन करने वाले लोकतंत्र समर्थकों का संघर्ष आखिरकार कामियाब हो गया है। हांगकांग सरकार ने चीनी प्रत्यर्पण बिल को वापस ले लिया है। हालांकि ये बात कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कही जा रही है।

हांगाकांग में लाखों लोग सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ये विरोध प्रदर्शन इस विवादास्पद प्रत्यर्पण विधेयक के कारण हुए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प भी देखने को मिलीं। 
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आजादी और लोकतंत्र की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों को काबू करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और लाठी चार्ज किया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने भी पुलिस पर पथराव और बांस के डंडों से हमला किया। 

क्या था कानून?

इस कानून के अनुसार अगर कोई व्यक्ति अपराध करके हांगकांग आ जाता है को उसे जांच प्रक्रिया में शामिल होने के लिए चीन भेजा जा सकता। हांगकांग की सरकार इस मौजूदा कानून में संशोधन के लिए फरवीर में प्रस्ताव लाई थी। कानून में संशोधन का प्रस्ताव एक घटना के बाद लाया गया। जिसमें एक व्यक्ति ने ताइवान में अपनी प्रमिका की कथित तौर पर हत्या कर दी और हांगकांग वापस आ गया था।

हांगकांग की अगर बात की जाए तो यह चीन का एक स्वायत्त द्वीप है। चीन इसे अपने संप्रभु राज्य का हिस्सा मानता है। वहीं हांगकांग की ताइवान के साथ कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है। जिसके कारण हत्या के मुकदमे के लिए उस व्यक्ति को ताइवान भेजना मुश्किल है।

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अगर ये कानून पास हो जाता तो इससे चीन को उन क्षेत्रों में संदिग्धों को प्रत्यर्पित करने की अनुमति मिल जाती, जिनके साथ हांगकांग के समझौते नहीं हैं। जैसे संबंधित अपराधी को ताइवान और मकाऊ भी प्रत्यर्पित किया जा सकता।

हांगकांग के लोग इस कानून का जमकर विरोध कर रहे थे। वो सरकार द्वारा कानून को निलंबित किए जाने के बाद भी नहीं थमे, उनका कहना था कि इसे पूरा तरह से खत्म कर दिया जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि इन लोगों का मानना है कि अगर ये कानून कभी भी पास होता है तो हांगकांग के लोगों पर चीन का कानून लागू हो जाएगा। जिसके बाद चीन मनमाने ढंग से लोगों को हिरासत में ले लेगा और उन्हें यात्नाएं देगा।

लोगों को अब हांगकांग सरकार पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं रहा है। बीते कुछ सालों से सरकार के लिए लोगों में अविश्वास काफी बढ़ गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि वो बीजिंग के प्रभाव में आकर फैसले ले रही है। जिसके चलते लोग डरे हुए हैं कि बीजिंग गलत तरीके से इस कानून का लोगों के खिलाफ इस्तेमाल करेगा।

चीन से क्यों गुस्सा हैं हांगकांग वासी?

बात है साल 1997 की। तब हांगकांग को चीन के हवाले कर दिया गया था। उस वक्त बीजिंग ने 'एक देश-दो व्यवस्था' की अवधारणा के तहत कम से कम 2047 तक लोगों की स्वतंत्रता और अपनी कानूनी व्यवस्था को बनाए रखने की गारंटी दी थी। लेकिन ऐसा ज्यादा समय तक नहीं चला।

हांगकांग में 2014 में 79 दिनों तक चले 'अंब्रेला मूवमेंट' के बाद चीनी सरकार ने लोकतंत्र का समर्थन करने वाले लोगों पर जमकर कार्रवाई की। इस आंदोलन के समय चीन की सरकार से कोई सहमति नहीं बन पाई थी। विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों को जेल में डाल दिया गया था। आजादी का समर्थन करने वाली एक पार्टी पर प्रतिंबध लगा दिया गया था। 

हांगकांग की सरकार ने इस कानून को प्रस्तावित करते हुए तर्क दिया था कि अगर इसे जल्द से जल्द पारित नहीं किया गया, तो हांगकांग के लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। ये जगह अपराधियों का अड्डा बनकर रह जाएगी। सरकारी अधिकारियों का कहना था कि ये नया कानून केवल गंभीर अपराध करने वालों पर ही लागू होगा। जिसमें कम से कम सात साल की सजा का प्रावधान है।
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