अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप का अमेरिका राष्ट्रपति चुनाव से पहले हिंदू प्रेम जागता हुआ दिख रहा है। जहां उन्होंने गुरुवार को दिवाली की शुभकामनाएं देते हुए बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले की निंदा की साथ ही भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने का संकल्प लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना अच्छा दोस्त बताया। बता दें कि अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में 5 नवंबर को होने वाले है। जिसको लेकर डोनाल्ड ट्रंप और कमला हैरिस के बीच कड़ा मुकाबला है।
इसके साथ ही ट्रंप ने कहा कि मेरे राष्ट्रपति बनने के बाद हम भारत और मेरे अच्छे दोस्त प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी महान साझेदारी को और मजबूत करेंगे। उन्होंने कहा कि हम कट्टरपंथी वामपंथियों के धर्म-विरोधी एजेंडे के खिलाफ हिंदू अमेरिकियों की भी रक्षा करेंगे। हम आपकी स्वतंत्रता के लिए लड़ेंगे।
बांग्लादेशी हिंदुओ पर हमलो की निंदा
ट्रंप ने कहा कि बांग्लादेश पूरी तरह से अराजकता की स्थिति में है और आरोप लगाया कि उनकी डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस और उनके बॉस राष्ट्रपति जो बिडेन ने दुनिया भर में और अमेरिका में हिंदुओं की अनदेखी की है।
उन्होंने कहा कि मैं हिंदुओं ईसाइयों और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ बर्बर हिंसा की कड़ी निंदा करता हूं, जिन पर बांग्लादेश में भीड़ द्वारा हमला किया जा रहा है और लूटपाट की जा रही है, जो पूरी तरह से अराजकता की स्थिति में है।
इसके साथ ही ट्रंप ने कहा हम कट्टरपंथी वामपंथियों के धर्म-विरोधी एजेंडे से हिंदू अमेरिकियों की भी रक्षा करेंगे। हम आपकी आजादी के लिए लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि मेरे प्रशासन के तहत, हम भारत और मेरे अच्छे दोस्त प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी महान साझेदारी को भी मजबूत करेंगे।
पहली बार ट्रंप ने बांग्लादेश पर बात
उन्होंने कहा कि मेरे कार्यकाल में ऐसा कभी नहीं होता। कमला और जो ने दुनिया भर में और अमेरिका में हिंदुओं की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि इजरायल से लेकर यूक्रेन और हमारी दक्षिणी सीमा तक वे विनाशकारी रहे हैं, लेकिन हम अमेरिका को फिर से मजबूत बनाएंगे और ताकत के जरिए शांति वापस लाएंगे।
बता दें कि यह पहली बार है कि ट्रंप ने बांग्लादेश के मुद्दे पर बात की है। जुलाई-अगस्त में बांग्लादेश में सैकड़ों हिंदू मारे गए थे, जब छात्रों का आंदोलन बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों में बदल गया था, जिसके कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को 5 अगस्त को देश छोड़कर भागना पड़ा था।