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Hindenburg: हेज फंड के साथ मिलकर रिपोर्ट बनाने को लेकर संदेह के घेरे में नैट एंडरसन, दर्ज हो सकता है मामला

Sun, 19 Jan 2025 06:20 PM IST
शिव शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

अमेरिकी इंवेस्टमेंट रिसर्च फर्म और शॉर्ट सेलिंग ग्रुप हिंडनबर्ग रिसर्च कंपनी को बंद करने के एलान के बाद से नाथन एंडरसन चर्चा में हैं। हिंडनबर्ग रिसर्च को लेकर ये एलान ऐसे वक्त में आया था, जब अमेरिका में राष्ट्रपति जो बाइडन का चार वर्षों का कार्यकाल पूरा होने में बस कुछ ही दिन बचे हैं।
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नाथन उर्फ नैट एंडरसन - फोटो : सोशल मीडिया।
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विस्तार
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उद्योगपतियों के घोटाले उजागर करने का दावा करने वाली निवेश शोध फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च को बंद करने की घोषणा के बाद नाथन उर्फ नैट एंडरसन चर्चा में हैं।  उन्होंने भारतीय उद्योगपति गौतम अदाणी और अमेरिकी फर्म निकोला में गड़बड़ियों के आरोप लगाकर तहलका मचाया था। अब वे कंपनियों को लक्षित करने वाली रिपोर्ट तैयार करने में हेज फंड के साथ कथित संबंधों को लेकर संदेह के घेरे में हैं। कनाडा के ओंटारियो की एक अदालत के समक्ष दायर दस्तावेजों का हवाला देते रिपोर्ट्स में इसका दावा किया गया है।

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कनाडाई पोर्टल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अदालत के दस्तावेजों से हिंडनबर्ग की गुप्त सांठगांठ और कंपनी तथा उसके संस्थापक द्वारा किए गए संभावित सिक्योरिटी फ्रॉड का खुलासा हुआ है। इसमें कहा गया है कि कथित तौर पर पता चला है कि हिंडनबर्ग ने एक रिपोर्ट तैयार करते समय एंसन के साथ मिलीभगत की थी। 

वहीं, मानहानि के एक मामले में ओंटारियो सुपीरियर कोर्ट ऑफ जस्टिस में कनाडा के एंसन हेज फंड के प्रमुख, मोएज कसम ने  जो दस्तावेज दायर किए हैं। उनमें कहा गया है कि उनकी फर्म ने हिंडनबर्ग के नैट एंडरसन सहित अलग स्रोतों के साथ रिसर्च शेयर किया है। 
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कनाडा की ऑनलाइन इंवेस्टिगेटिव न्यूज आउटलेट 'मार्केट फ्रॉड्स' की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि नेट एंडरसन और एंसन फंड्स दोनों के खिलाफ सिक्योरिटी फ्रॉड के कई मामले हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि मंदी की रिपोर्ट तैयार करने का यह पूरा मामला जब अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (एसईसी) के पास पहुंचेगा तो  नेट एंडरसन के खिलाफ प्रतिभूति धोखाधड़ी के आरोप लगाए जा सकते हैं। 

कंपनी बंद करने के एलान के बाद से चर्चा में
अमेरिकी इंवेस्टमेंट रिसर्च फर्म और शॉर्ट सेलिंग ग्रुप हिंडनबर्ग रिसर्च कंपनी को बंद करने के एलान के बाद से नाथन एंडरसन चर्चा में हैं। हिंडनबर्ग रिसर्च को लेकर ये एलान ऐसे वक्त में आया था, जब अमेरिका में राष्ट्रपति जो बाइडन का चार वर्षों का कार्यकाल पूरा होने में बस कुछ ही दिन बचे हैं। डोनाल्ड ट्रंप 20 जनवरी को अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने ही वाले हैं। आपको बता दें कि हाल ही में हाउस ज्यूडिशियरी कमेटी के एक सदस्य और रिपब्लिकन सांसद ने न्याय विभाग से हिंडनबर्ग को लेकर जांच की मांग की थी। 

नाम की कहानी
एंडरसन ने ‘हिंडनबर्ग रिसर्च’ नाम जानबूझकर चुना, जो 1937 के हिंडनबर्ग एयरशिप हादसे से प्रेरित था, जिसमें लगभग 35 लोग मारे गए थे। वह लोगों को शेयर बाजार की कारगुजारियों से बचाने का दावा करते हैं।

ब्रोकर से लेकर व्हिसलब्लोअर
एंडरसन ने सबसे पहले हेज फंड्स को ध्यान में रखते हुए एक ब्रोकरेज फर्म शुरू की थी, जो धोखाधड़ी का आकलन करने पर केंद्रित थी। हालांकि, 2017 तक, फर्म ने केवल 58,382 डॉलर की शुद्ध पूंजी जमा की थी, जिससे एंडरसन के मकान मालिक ने बेदखली की कार्यवाही शुरू कर दी। इन चुनौतियों के कारण एंडरसन ने अपना ब्रोकरेज लाइसेंस छोड़ दिया और हिंडनबर्ग रिसर्च की स्थापना की।

आरोपों का खेल
एंडरसन की कंपनी हिंडनबर्ग ने सितंबर 2020 में अमेरिका की इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी निकोला कॉरपोरेशन में तकनीकी खामियों समेत कई गड़बड़ियों के आरोप लगाए। जांच के बाद निकोला को दोषी भी पाया गया। लेकिन हिंडनबर्ग को सबसे ज्यादा शोहरत जनवरी 2023 में भारत के प्रमुख उद्योगपति घराने अदाणी समूह पर निवेश संबंधी गड़बड़ी के आरोप लगाने से मिली। बताया जाता है कि अदाणी समूह पर आरोप लगाने के बदले में एंडरसन की फर्म को करीब 40 लाख डॉलर की कमाई हुई थी। इसके बाद पिछले साल अगस्त में हिंडनबर्ग ने सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच और उनके पति पर अदाणी समूह से हितलाभ लेने का भी आरोप लगाया था। 

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