इससे पहले सीनेट में बोलते हुए खार ने कहा कि पाकिस्तान ने हमेशा क्षेत्र में शांति को बढ़ावा देने के लिए पहल की है, लेकिन अभी सीमापार शत्रुता एक अद्वितीय प्रकार की है। पाकिस्तान को कभी-कभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के साथ अपने संबंधों को सामान्य करने के लिए कहा जाता था, लेकिन दुनिया को उन संदेशों को देखना चाहिए जो नई दिल्ली इस्लामाबाद को भेज रही है।
भारत की तरफ से शंघाई सहयोग संगठन के लिए पाकिस्तान को न्यौता भेजने की खबरों के बीच पाकिस्तान ने बड़ा बयान दिया है। पड़ोसी मुल्क ने दावा किया कि इस्लामाबाद और नई दिल्ली के बीच पर्दे के पीछे कोई बातचीत नहीं हो रही है। विदेश राज्य मंत्री हिना रब्बानी खार ने संसद के ऊपरी सदन सीनेट को बताया कि इस समय ऐसी कोई बात नहीं चल रही है। बैकचैनल कूटनीति तब की जाती है, जब उससे परिणाम मिलने की उम्मीद हो।
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साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में विदेश कार्यालय की प्रवक्ता मुमताज जहरा बलोच ने भी हिना रब्बानी खार की टिप्पणी को दोहराया। बलोच ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच कोई बैकचैनल कूटनीति नहीं चल रही है।
इससे पहले सीनेट में बोलते हुए खार ने कहा कि पाकिस्तान ने हमेशा क्षेत्र में शांति को बढ़ावा देने के लिए पहल की है, लेकिन अभी सीमापार शत्रुता एक अद्वितीय प्रकार की है। पाकिस्तान को कभी-कभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के साथ अपने संबंधों को सामान्य करने के लिए कहा जाता था, लेकिन दुनिया को उन संदेशों को देखना चाहिए जो नई दिल्ली इस्लामाबाद को भेज रही है।
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उन्होंने कहा कि हमें जो संदेश मिल रहे हैं, वे सभी भड़काने वाले हैं। पाकिस्तान को इस क्षेत्र की संभावनाओं को उजागर करने में सबसे बड़ी दिलचस्पी है, लेकिन जब आपके पास दूसरी तरफ जो सरकार है, जिसके प्रधानमंत्री कहते हैं कि उनकी परमाणु संपत्ति दीवाली के लिए नहीं है, तो हम क्या कर सकते हैं?
उनकी यह टिप्पणी भारतीय मीडिया द्वारा रिपोर्ट किए जाने के कुछ दिनों बाद आई है कि नई दिल्ली ने मई में गोवा में शंघाई सहयोग संगठन या एससीओ के विदेश मंत्रियों और मुख्य न्यायाधीशों की बैठकों में भाग लेने के लिए विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी और पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश उमर अता बंदियाल को आमंत्रित किया है। बलोच ने भी अपनी ब्रीफिंग में कहा कि पाकिस्तान को एससीओ बैठक के मेजबान के रूप में भारत द्वारा भेजा गया निमंत्रण मिला था और वह इसकी समीक्षा कर रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी पर बनी बीबीसी के विवादास्पद डॉक्यूमेंट्री के बारे में बात करते हुए खार ने कहा कि प्रसारक ने दुनिया को दिखाया था कि पाकिस्तान ने पहले ही क्या कहा था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने इतिहास से सीखा है, लेकिन क्षेत्र के कुछ देशों ने ऐसा नहीं किया।