बांग्लादेश में भारत के नए हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने गुरुवार को ढाका स्थित बंगभवन में राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन को अपना परिचय पत्र सौंपकर औपचारिक रूप से अपनी जिम्मेदारी संभाल ली। इस मौके पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया और प्रेसिडेंट गार्ड रेजिमेंट की एक चुस्त-दुरुस्त टुकड़ी ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया। परिचय पत्र सौंपने के बाद दिनेश त्रिवेदी ने राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन से शिष्टाचार मुलाकात की। बैठक में दोनों देशों के रिश्तों, सीमा से जुड़े मुद्दों और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे अहम विषयों पर चर्चा हुई।
गृह मंत्रालय ने जारी किया मेमोरैंडम
गृह मंत्रालय एक आधिकारिक मेमोरैंडम में कहा गया है कि मौजूदा वरीयता क्रम में कोई बदलाव किए बिना, त्रिवेदी को व्यक्तिगत तौर पर केंद्रीय कैबिनेट मंत्री का रैंक और दर्जा दिया गया है। मेमोरैंडम में लिखा है, 'मुझे यह कहने का निर्देश दिया गया है कि बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी को 'टेबल ऑफ प्रिसिडेंस' में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के बराबर का दर्जा दिया गया है। यह दर्जा उन्हें व्यक्तिगत तौर पर दिया गया है और इसके लिए 'टेबल ऑफ प्रिसिडेंस' में कोई संशोधन नहीं किया गया है। 'टेबल ऑफ प्रिसिडेंस' में यह स्थान केवल औपचारिक कार्यक्रमों के लिए है।'
क्या है टेबल ऑफ प्रिसिडेंस?
'टेबल ऑफ प्रिसिडेंस' एक आधिकारिक प्रोटोकॉल सूची है जो यह तय करती है कि सरकारी, औपचारिक और आधिकारिक कार्यक्रमों में गणमान्य व्यक्तियों को किस क्रम में बैठाया जाएगा, उनका परिचय कैसे कराया जाएगा और उन्हें क्या सम्मान दिया जाएगा। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से सरकारी कार्यक्रमों, राष्ट्रीय उत्सवों, राजनयिक मुलाकातों और प्रोटोकॉल व्यवस्था की ज़रूरत वाले अन्य मौकों पर किया जाता है। 'टेबल ऑफ प्रिसिडेंस' में तय क्रम सरकारी और औपचारिक मौकों के लिए होता है और सरकार के रोज़मर्रा के कामकाज में इसका कोई असर नहीं होता। 'टेबल ऑफ प्रिसिडेंस' में शामिल लोगों का रैंक आर्टिकल नंबर के आधार पर तय होता है। एक ही आर्टिकल में शामिल लोगों के नाम वर्णमाला के क्रम (अल्फाबेटिकल ऑर्डर) में रखे जाते हैं। एक ही आर्टिकल में शामिल लोगों को उस आर्टिकल में शामिल होने की तारीख के आधार पर वरीयता दी जाती है।
यह कदम सिर्फ औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित
अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि यह कदम सिर्फ औपचारिक कार्यक्रमों तक ही सीमित है और इसे बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर के तौर पर त्रिवेदी के आधिकारिक पद या जिम्मेदारियों में बदलाव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इस फैसले से त्रिवेदी आधिकारिक औपचारिक कार्यक्रमों के लिए प्रोटोकॉल पदानुक्रम (हायरार्की) में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के स्तर पर आ जाएंगे।
पांच जून को राष्ट्रपति ने सौंपा था 'लेटर ऑफ क्रेडेंस'
केंद्र सरकार कभी-कभी किसी व्यक्ति के काम की प्रकृति या अन्य बातों को ध्यान में रखते हुए उन्हें व्यक्तिगत तौर पर 'टेबल ऑफ प्रिसिडेंस‘ में कोई खास जगह देती है। ऐसे फैसलों से 'टेबल ऑफ प्रिसिडेंस' के तहत तय कुल पदानुक्रम में अपने-आप कोई बदलाव नहीं होता; संवैधानिक अधिकारियों, मंत्रियों, जजों, राजनयिकों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के लिए प्रोटोकॉल व्यवस्था उसी के अनुसार चलती रहती है। विदेश मंत्रालय ने 27 अप्रैल को ढाका में अगले राजदूत के तौर पर त्रिवेदी की नियुक्ति का एलान किया था। इसके बाद, 5 जून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें औपचारिक रूप से 'लेटर ऑफ क्रेडेंस' (नियुक्ति पत्र) सौंपा।
ये भी पढ़ें: भारत का बड़ा फैसला: बांग्लादेशी नागरिकों के लिए फिर शुरू होगी टूरिस्ट वीजा सेवा, 28 जून से कर सकेंगे आवेदन
केंद्र में रेल व स्वास्थ्य राज्य मंत्री रह चुके हैं त्रिवेदी
एक अनुभवी राजनेता के तौर पर, त्रिवेदी के पास इस भूमिका के लिए जरूरी प्रशासनिक अनुभव है। उन्होंने मनमोहन सिंह की सरकार में केंद्रीय रेल मंत्री और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री के तौर पर काम किया है। उन्होंने राज्यसभा और लोकसभा, दोनों में पश्चिम बंगाल का प्रतिनिधित्व किया है। लोकसभा में वे 2009 से 2019 तक बैरकपुर निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए थे। विधायी कार्यों में उनके योगदान के लिए त्रिवेदी को 2016-17 के 'आउटस्टैंडिंग पार्लियामेंटेरियन अवॉर्ड' (बेहतरीन सांसद पुरस्कार) से सम्मानित किया गया था। उन्होंने कई संसदीय मंचों की अध्यक्षता भी की है, जिनमें 'इंडो-यूरोपियन यूनियन पार्लियामेंट्री फोरम' भी शामिल है। बाद में, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद वे 2021 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे।