गाजा में मानवीय मदद रोकने के इस्राइल के कदम के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र न्यायालय में सुनवाई शुरू हो गई है। गाजा में इस्राइल के कब्जे वाले क्षेत्रों में फलस्तीनी नागरिकों की तत्काल आवश्यक मानवीय सहायता रोके जाने दिक्कत बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र न्यायालय में हो रही सुनवाई को इस्राइली विदेश मंत्री गिदोन सार ने उत्पीड़न करार दिया है।
गाजा में इस्राइल ने दो मार्च से खाद्य, ईंधन, दवा और अन्य मानवीय आपूर्ति के प्रवेश को रोक दिया है। इसके अलावा इस्राइल ने फलस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसी को अपने क्षेत्र में कार्य करने से रोक दिया था। संयुक्त राष्ट्र महासभा समेत कई देशों ने इस्राइल के कदम के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र न्यायालय का रुख किया है। महासभा ने फलस्तीनी नागरिक आबादी के अस्तित्व के लिए आवश्यक तत्काल आवश्यक आपूर्ति सुनिश्चित करने और सुविधा प्रदान करने के लिए कब्जे वाले क्षेत्रों में इस्राइल के दायित्वों पर एक महत्वपूर्ण निर्णय लेने की मांग की है। इस मामले को लेकर संयुक्त राष्ट्र न्यायालय में सुनवाई शुरू हो गई है।
इस्राइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने इस सुनवाई को अपने देश के व्यवस्थित उत्पीड़न और अवैधीकरण का हिस्सा बताया। सार ने कहा कि अदालत पूरी तरह से राजनीतिक हो रही है। उन्होंने कार्यवाही को शर्मनाक बताया।
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इस्राइल कर रहा लोगों की हत्या: फलस्तीन
फलस्तीनी राजदूत अम्मार हिजाजी ने संयुक्त राष्ट्र अदालत में सुनवाई के दौरान कहा कि गाजा में इस्राइल लोगों की हत्या कर रहा है। उन्हें विस्थापित कर रहा है और सहायता देने वाले कर्मियों को निशाना बना रहा है। इस्राइल ने इससे इनकार किया है।
सुनवाई में इस्राइल को बोलने की नहीं है अनुमति
संयुक्त राष्ट्र न्यायालय में मामले की सुनवाई के दौरान सबसे पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपना पक्ष रखा। इसके बाद फलस्तीनी प्रतिनिधि अपनी बात रखेंगे। बताया जा रहा है कि सुनवाई में 40 राज्य और चार अंतर्राष्ट्रीय संगठन भाग ले रहे हैं। वहीं सुनवाई में इस्राइल को बोलने की अनुमति नहीं है। वह लिखित बयान प्रस्तुत कर सकता है।
वहीं बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव के खिलाफ अमेरिका बुधवार को अपनी बात रखेगा। जबकि मंगलवार को इस्राइल का विरोधी दक्षिण अफ्रीका अपने तर्क प्रस्तुत करेगा। पिछले साल न्यायालय में एक अलग मामले की सुनवाई में दक्षिण अफ्रीका ने इस्राइल पर गाजा में फलस्तीनियों के खिलाफ नरसंहार करने का आरोप लगाया था।
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फैसला सुनाने में लग सकता है समय
संयुक्त राष्ट्र न्यायालय को अपना फैसला सुनाने में महीनों लग सकते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, लेकिन इसका अंतरराष्ट्रीय न्यायशास्त्र, इस्राइल को दी जाने वाली अंतरराष्ट्रीय सहायता और जनमत पर गहरा असर पड़ सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ ऑस्ट्रेलिया में अंतरराष्ट्रीय कानून की विशेषज्ञ जूलियट मैकइंटायर ने बताया कि सलाहकार की राय स्पष्टता प्रदान करती है। कोर्ट के नतीजों का इस्तेमाल इस्राइल पर सहायता पर प्रतिबंधों को कम करने के लिए दबाव बनाने के लिए किया जा सकता है।
इस्राइल ने संयुक्त राष्ट्र की एक और एजेंसी पर लगाया प्रतिबंध
इस्राइल ने संयुक्त राष्ट्र की फलस्तीनी शरणार्थी सहायता एजेंसी (यूएनआरडब्लूए) पर जनवरी से प्रतिबंध लगा रखा है। इस्राइल का दावा है कि इस समूह में हमास की गहरी पैठ है। गाजा में यूएनआरडब्लूए के लगभग 13,000 कर्मचारियों में से 19 ने हमास के हमले में भाग लिया था। जबकि यूएनआरडब्ल्यूए ने कहा कि उसने नौ कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र की आंतरिक जांच में यह निष्कर्ष निकला था कि वे इसमें शामिल हो सकते हैं, हालांकि इसके कोई साक्ष्य नहीं मिले।
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