इटली में कोरोना के प्रकोप के बीच डॉक्टर और दूसरे स्वास्थ्यकर्मी डटे हुए हैं। कई डॉक्टर व अन्य पैरामेडिक महीनेभर से परिवार से नहीं मिल पाए हैं। एक अस्पताल में कोरोना का इलाज कर रहीं 51 वर्षीय डॉ. चांग वुई बताती हैं कि 24 साल की बेटी ने जब पूछा कि परिवार के साथ बाहर खाना खाने कब जा पाएंगे तो मैंने कहा, जब तक मौत का मंजर खत्म नहीं हो जाता, तब तक नहीं जा सकते।
इटली के पुंगुल में रोगियों का इलाज कर रही वुई कहती हैं कि मेरे लिए ये कोई नई बात नहीं है कि हर दो में से एक मरीज कोरोना संक्रमित होता है जो मेरे सामने बैठता है, मैं उसकी तकलीफ सुनती हूं और उसका इलाज करती हूं। मुझे तो अपने मम्मी-पापा की चिंता सताती है कि कहीं मेरी वजह से उन्हें संक्रमण न हो जाए। वे इस वक्त 80 वर्ष के हैं। इसी डर से मैंने घर जाना बंद कर दिया है। जाती हूं तो 30 मिनट से अधिक समय नहीं देती हूं।
नोरासिंता मंसूर (38) गर्भवती होने के बाद भी रोगियों की जांच में जुटी हैं। वे कहती हैं कि मेरा मकसद अपने साथियों को इस बात के लिए प्रोत्साहित करना है कि वे बिना आराम की जनसेवा करें क्योंकि उनकी मेहनत से कई लोगों की जिंदगी बच जाएगी।