इस बात के साफ संकेत मिले हैं कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का प्रतिनिधिमंडल की नेपाल यात्रा का खास मकसद नेपाल की अलग-अलग कम्युनिस्ट पार्टियों में एकता कराना है। पिछले हफ्ते जब इस दल की नेपाल यात्रा का कार्यक्रम सामने आया, तभी ये कयास लगाया गया था कि ये दल नेपाल के अगले आम चुनाव के मद्देनजर यहां आ रहा है। इस दल का नेतृत्व चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के विदेश संपर्क विभाग के प्रमुख लिउ जियानचाओ कर रहे हैं।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक लिउ ने अपनी यात्रा के पहले दिन सरकारी पदाधिकारियों से मुलाकात का कार्यक्रम पूरा कर लिया। अब अपनी यात्रा के बाकी समय में उनका प्रमुख कार्यक्रम तीनों प्रमुख कम्युनिस्ट पार्टियों के नेताओं से बातचीत करना है। अपनी चार दिन की यात्रा के आखिरी दिन बुधवार को चीन लौटने से पहले लिउ नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी से मिलेंगे।
नेपाल की तीनों कम्युनिस्ट पार्टियों के नेताओं में इस समय गहरा आपसी अविश्वास है। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट) इस समय नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन में शामिल हैं। जबकि पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) विपक्ष की प्रमुख पार्टी है। इन पार्टियों के नेताओं ने बताया है कि लिउ और उनके साथ आए चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के दूसरे नेता दो दिन तक माओइस्ट सेंटर के नेता पुष्प कमल दहल, यूनिफाइड सोशलिस्ट के नेता माधव कुमार नेपाल और यूएमएल के नेता केपी शर्मा ओली के साथ गहन विचार-विमर्श करेंगे।
कम्युनिस्ट पार्टियों से जुड़े सूत्रों ने मीडिया से बातचीत में पुष्टि की है कि चीन नेपाल की सभी कम्युनिस्ट पार्टियों में एकता चाहता है। इसीलिए पिछले महीने विदेश संपर्क विभाग का प्रमुख बनते ही लिउ ने नेपाल को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। यहां आने के पहले ही उन्होंने दहल और ओली के साथ वीडियो वार्ता की। समझा जाता है कि उस दौरान भी उन्होंने कम्युनिस्ट एकता पर जोर दिया।