सार
साल 2025 के हज में भारी गर्मी, 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर पाबंदी और अनधिकृत प्रवेश रोक जैसी चुनौतियां हैं। पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में आर्थिक तंगी के कारण हज कोटे से कम तीर्थयात्रियों को भेजा गया। किसान जहीर अहमद ने भी हज का खर्च तीन किस्तों में भरा।
पूरी दुनिया के मुस्लिम इस वक्त इस्लाम के अहम पांच स्तंभों में एक हज के लिए सऊदी के शहर मक्का में हैं। आने वाले दिनों में जायरीन इबादत में डूब जाएंगे, लेकिन साल 2025 का हज इबादत करने वालों के लिए आसान नहीं है। इस बार इबादत की राह में भीषण गर्मी और अन्य दुनियावी चुनौतियों से भी उन्हें जूझना पड़ रहा है। मसलन 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को हज लाने पर पांबदी और अनधिकृत प्रवेश पर रोक। वहीं, पाकिस्तान व बांग्लादेश जैसे मुस्लिम बहुल मुल्कों के पास हज का खर्च तक पूरा नहीं पड़ रहा है। नतीजन, इन देशों ने कोटे से कम हाजियों को हज रवाना किया।
पाकिस्तान किसान जहीर अहमद ने कहा कि उनके पास हज के लिए अग्रिम भुगतान करने को 12 लाख रुपये नहीं थे। उन्होंने तीन किस्तों में भुगतान किया। दिसंबर में हज के लिए अग्रिम भुगतान के साथ आवेदन किया और फरवरी में अपने भुगतान पूरे किए।
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नहीं पूूरा हुआ हज का कोटा
हज पर खर्च 4,000 से 20,000 डॉलर तक होता है। सऊदी अरब ने लचीले भुगतान की शुरुआत की है। घरेलू तीर्थयात्री बुकिंग के 72 घंटे में 20 फीसदी, रमजान के दौरान 40 फीसदी व अगले महीने आखिरी 40 फीसदी तक का भुगतान करते हैं। हालांकि, बांग्लादेश और पाकिस्तान के लिए यह खर्च भारी है, खासकर करेंसी गिरने, महंगाई और टैक्स की वजह से।
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भले ही पाकिस्तान ने हाजियों को राहत देने के लिए योजना सस्ती की और किस्तों में भुगतान की सुविधा शुरू की, पर यह सब आसान नहीं है। बांग्लादेश के हज एजेंसी एसोसिएशन के महासचिव फरीद अहमद मजूमदार ने कहा कि देश को इस साल लगभग 1,27,000 जायरीनों को भेजने की इजाजत दी गई थी, लेकिन मुख्य रूप से उच्च लागतों की वजह से यह कोटा पूरा करने में नाकाम रहे।