ट्रंप प्रशासन के इस फैसले से बड़ी संख्या में ऐसे भारतीय आईटी प्रोफेशनल प्रभावित होंगे जिनको अमेरिकी और भारतीय कंपनियों ने 1 अक्तूबर से शुरू होने वाले वित्तवर्ष 2021 के लिए यह वीजा जारी किया है। अब ऐसे पेशेवरों को कम से कम इस साल के अंत तक इंतजार करना होगा। इस फैसले का असर उन पेशेवरों पर भी पड़ेगा जो अपना एच-1 बी वीजा नवीनीकृत कराना चाहते हैं।
इन लोगों पर कोई प्रभाव नहीं
ट्रंप की घोषणा के मुताबिक, इस फैसले का असर अमेरिका से बाहर रह रहे लोगों पर पड़ेगा। कानूनी रूप से अमेरिका में स्थायी रूप से रह रहे लोगों और ऐसे विदेशी नागरिक जो अमेरिकी नागरिकों के स्पाउस या बच्चे हैं, उन पर इस फैसले का असर नहीं पड़ेगा। इसके अलावा अस्थायी श्रम और खाद्य आपूर्ति शृंखला जैसी जरूरी सेवाओं के लिए अमेरिका आने वालों को भी इस प्रतिबंध से छूट रहेगी।
ट्रंप का फैसला भारतीयों पर सर्वाधिक असर डालेगा, क्योंकि वे एच-2 बी को छोड़कर अन्य वीजा के सबसे बड़े लाभार्थी हैं। अमेरिका में करीब चार लाख एच-1 बी और एक लाख एल-1 भारतीय वीजा धारक हैं जो कई टेक और आईटी फर्मों में कार्यरत हैं।
वीजा प्रतिबंध से आईटी कंपनियों की प्रतिभा व आपूर्ति शृंखला प्रभावित होगी। टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और कॉग्निजेंट जैसी कंपनियां गूगल, फेसबुक और अमेजन जैसी अमेरिकी टेक फर्मों के साथ वीजा की सबसे बड़ी लाभार्थी हैं। बता दें कि एच-2 बी वीजा मेक्सिको के प्रवासियों पर लागू होता है।
दुरुपयोग रोकने का निर्देश
ट्रंप ने एच-1 बी वीजा का गलत इस्तेमाल रोकने का भी निर्देश दिया है। अगर कोई वीजा से जुड़े नियमों का पालन नहीं करता है तो अमेरिका का श्रम मंत्रालय कार्रवाई करेगा। हालांकि फूड इंडस्ट्री, मेडिकल और कुछ अन्य क्षेत्रों के लिए वीजा जारी करने को मंजूरी दी जा सकती है।