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सऊदी अरब: जहां योग गैर इस्लामिक माना जाता था, वहां अब सैकड़ों लोग सीख रहे हैं

Tue, 02 Oct 2018 11:30 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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नौफ मारवाई
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इस्लामिक मुल्क सऊदी अरब में पांच साल पहले तक योग अभ्यास को कुफ्र माना जाता था। यही नहीं सऊदी अरब में योग के बारे में सोचना भी अपराध था। लेकिन दुनियाभर में योग के बारे में दृष्टिकोण बदल रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी योग को मान्यता देते हुए ऐसे समय में सऊदी अरब में भी सैकड़ों लोग योग सीख रहे हैं।
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सऊदी अरब में योग को लेकर आ रहे इस बदलाव के पीछे कई कारण है। उनमें से एक हैं 38 वर्षीय नौफ मारवाई। मारवाई ने अपने प्रयास से सऊदी में सैकड़ों लोगों को योग सिखाया है। मारवाई की संस्था का नाम अरब योगा फाउंडेशन है। सऊदी अरब में महिलाओं के लिए योग स्टूडियो मारवाई की देन माना जाता है।

संयुक्त राष्ट्र ने योग को दी मान्यता

संयुक्त राष्ट्र ने 11 दिसंबर 2014 को 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की। दुनियाभर के कई देशों में योग अभ्यास को नियमित रूप से अपनाया जा रहा है।
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मारवाई कहती हैं कि योग को मान्यता मिलने के कुछ महीने में ही मक्का और मदीना सहित कई बड़े शहरों में योग स्टूडियो खुल गए। योग प्रशिक्षकों का नया उद्योग खड़ा हो गया।
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मौलवियों को सूर्य नमस्कार से थी आपत्ति

जेद्दाह में योग स्टूडियो में प्रशिक्षण दे रही नौफ मारवाई
गैर इस्लामिक माना जाता था योग

अरब में पहले योग को सिर्फ हिंदू धार्मिक परंपरा माना जाता था। योग करना गैर इस्लामिक माना जाता था। लेकिन अब सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने योग को खेल के रूप में मान्यता दी है। अब यह देशभर में लोकप्रिय हो रहा है।

मौलवियों को सूर्य नमस्कार से थी आपत्ति

मारवाई कहती हैं कि पहले उन्हें लोगों ने बहुत परेशान किया। नफरत भरे संदेश भेजे। मौलवियों को सूर्य नमस्कार पर आपत्ति थी। अब लोग कहते हैं कि योग चुस्त-दुरुस्त रहने के व्यायाम हैं। इसका धर्म से लेना-देना नहीं है।
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