फ्रांस के राष्ट्रपति एनैनुएल मैंक्रो ने कहा कि हम सीरिया में रासायनिक हथियारों के उत्पादन को बर्दाश्त नहीं कर सकते। सीरिया ने ऐसा करके 2017 की सहमति की सीमा का उल्लंघन किया है। वहीं ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा ने कहा कि सीरिया के रासायनिक हथियारों के जखीरे को नष्ट करने के सिवा हमारे पास कोई चारा नहीं था।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी अपने पूरे आक्रामक अंदाज में हैं। इतना ही नहीं यूरोपीय देश, नाटो सदस्य देश भी सीरिया के खिलाफ हैं। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद यह पहली बार है, जब दुनिया के तमाम शक्तिशाली देश दो धड़े में बंटे हुए नजर आ रहे हैं। इस मामले में चीन अपने चिरपरिचित अंदाज में अलग रुख अपनाए है।
भारत नहीं चाहता सीरिया में और बढ़े तनाव की जांच की मांग
सीरिया में रसायनिक हमले के जवाब में अमेरिका, फ्रास, ब्रिटेन द्वारा की गई मिसाइलों की बमबारी तथा रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के आक्रामक तेवर तनाव बढ़ा दिया है। इस बीच भारत ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि भारत हालात पर गंभीरता से नजर रख रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह इस मामले में तनाव के बढऩे का पक्षधर नहीं है।
रवीश कुमार ने भारत की विदेश नीति के अनुरूप बयान दिया है। उन्होंने भारत के पक्ष को स्पष्ट करते हुए कहा कि नई दिल्ली रासायनिक हमले को लेकर लग रहे आरोपों की उद्देश्य पूर्ण और निष्पक्ष जांच का पक्षधर है। यह जांच अंतरराष्ट्रीय संस्था ओपीसीडब्ल्यू से कराई जानी चाहिए। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत चाहता है कि इस जांच के नतीजे आने तक सभी पक्षों को संयम से काम लेना चाहिए। इस स्थिति को देखते हुए भारत ने सभी पक्षों से संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अनुरुप व्यवहार करने, संवाद प्रक्रिया को निरंतर बनाये रखने तथा समाधान का उपाय तलाशने की अपील की है।
भारत का मानना है सीरिया के लोग इस समय कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे हैं। इसे संज्ञान में रखते हुए सभी पक्षों को अंतरराष्ट्रीय कानून, मूल्य मान्यता के अनुरुप व्यवहार करना चाहिए। ताकि समय रहते सीरियाई लोगों को शांतिपूर्ण जीवन जीने का अवसर मिल सके।