भारत सरकार के प्रयासों व अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संगठन द्वारा कतर को आप्रवासी मजदूरों का शोषण बंद करने की चेतावनी के बाद कतर सरकार ने श्रम कानूनों में सुधार का फैसला लिया है। इस फैसले के तहत कतर में काम करने वाले श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी की दर तय हो जाएगी, जिसका सबसे बड़ा फायदा वहां काम कर रहे करीब सात लाख भारतीयों को मिलेगा।
भारतीय श्रमिकों समेत अन्य आप्रवासी मजदूरों की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में कतर सरकार की काफी निंदा हो चुकी है। इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संगठन की बैठक से ठीक एक दिन पूर्व कतर सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले का सबसे सकारात्मक असर भारतीयों पर पड़ेगा, क्योंकि यहां कंपनियों में बड़े पदों पर नौकरी से लेकर निर्माण उद्योग में मजदूरों तक भारत के लोगों की तादाद सबसे अधिक है। इंटरनेशनल ट्रेड यूनियन कंफेडरेशन के महासचिव शरन बुरो ने कतर सरकार के इस फैसले को असली सुधार कहकर संबोधित किया है।
पिछले साल दिसंबर में कतर सरकार द्वारा ‘कफाला व्यवस्था’ समाप्त करने के कारण कामगारों को नौकरी या देश छोड़ने से पूर्व अपनी कंपनी से अनुमति लेगी पड़ती थी। लेकिन अब नया श्रम सुधार कानून आने के बाद विदेशी श्रमिकों या नौकरीपेशा कर्मचारियों को उनके पहचान पत्र कंपनियां जारी न करके कतर सरकार जारी करेगी और एक केंद्रीय संस्था सभी कामगारों को मिलने वाली सुविधाओं पर नजर रखेगी। कंपनियां अब कामगारों को कतर छोड़ने से रोक भी नहीं पाएंगी और कंपनियों के लिए सभी कामगारों को न्यूनतम मजदूरी देना बाध्यकारी होगा।
एमनेस्टी के आरोप
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने गत वर्ष आरोप लगाया था कि कतर में 2022 के फीफा विश्वकप के लिए बनने वाले स्टेडियम में श्रमिकों का शोषण हो रहा है। उसने कहा कि इन श्रमिकों को न सिर्फ मलिन बस्तियों में रहने को मजबूर किया जा रहा है बल्कि भर्ती के नाम पर उनसे भारी शुल्क भी वसूला गया है। जबकि उनका वेतन व पासपोर्ट जब्त कर लिया गया है।
भारतीयों से होता रहा है दुर्व्यवहार
कतर में श्रम सुधार कानून न होने के कारण अब तक यहां भारत से जाने वाले कामगारों के साथ बंधुआ श्रमिकों जैसा व्यवहार होता रहा है। कतर में दक्षिण भारतीय व केरल के श्रमिकों की संख्या बहुतायत में है। उन्हें कई माह तक वेतन नहीं मिलने और मांग करने पर कंपनी प्रबंधन द्वारा धमकाने की शिकायतें मिलती रही हैं। लेकिन अब भारतीयों का उत्पीड़न नहीं हो सकेगा।