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'एयर इंडिया' के कारण इजरायल सरकार पर मुकदमा

Sat, 31 Mar 2018 08:31 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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Air India
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भारत की सरकारी विमान कंपनी एयर इंडिया की एक 'ऐतिहासिक फ्लाइट' को लेकर इजरायल के सुप्रीम कोर्ट में आपत्ति दर्ज कराई गई है। अगर इस पर कोर्ट कोई आदेश जारी करता है तो एयर इंडिया ही नहीं केंद्र की मोदी सरकार को भी बड़ा झटका लगेगा। मोदी सरकार ने एक हफ्ते पहले ही शुरू हुई इस फ्लाइट को ऐतिहासिक करार दिया था।

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सरकार की तरफ से ये दावा किया जा रहा था कि सऊदी अरब और इजरायल के साथ भारत सरकार की ये बड़ी कूटनीतिक सफलता है। इस मामले में याचिकाकर्ता है इजरायली विमान कंपनी एल-अल जिसका दावा है कि विमानन क्षेत्र में निष्पक्षता और सभी को समान अधिकार नहीं मिल रहे।

इजरायली कंपनी ने ये अपील सऊदी अरब के उस फैसले के बाद की है जिसमें इजरायल जाने वाली किसी कमर्शियल फ्लाइट को पहली बार सऊदी अरब का एयर स्पेस इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है।
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किस फ्लाइट से है आपत्ति?
बीते गुरुवार, 22 मार्च की शाम एयर इंडिया ने दिल्ली से तेल अवीव के बीच एक फ्लाइट शुरू की है। ढाई सौ से ज्यादा यात्री ले जाने वाली ये फ्लाइट बाकियों की तुलना में दो घंटे से कुछ कम वक्त में दिल्ली से तेल अवीव का सफर पूरा करती है।

ये फ्लाइट ओमान, सऊदी अरब और जॉर्डन के ऊपर से होते हुए इजरायल पहुंचती है। जानकारों की राय है कि भारत ने कूटनीतिक संबंधों के दम पर सऊदी अरब से उनका एयर स्पेस इस्तेमाल करने की अनुमति ली है। इजरायल के विदेश मंत्री ने भी कहा था कि ये फ्लाइट रूट दोनों देशों के लिए अहम है।
 

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सऊदी अरब का बड़ा फैसला

एयर इंडिया की इस फ्लाइट के लिए सऊदी अरब ने 70 साल बाद अपना एयर स्पेस बैन हटाया है। इजरायल को सऊदी अरब मान्यता नहीं देता है और न ही वो उसे अपना एयर स्पेस इस्तेमाल करने की अनुमति देता है। इस तरह इजरायलके लिए जाने वाली कोई भी फ्लाइट सऊदी अरब के ऊपर से नहीं गुजरती है। इस वजह से इजरायल की एल-अल एयरलाइन को ईंधन के लिए ज़्यादा खर्च उठाना पड़ता है और वक्त भी अधिक लगता है।

एल-अल एयरलाइन की दलील
एयरलाइन कंपनी ने एयर इंडिया की फ्लाइट को मंजूरी देने के लिए इजरायल सरकार को भी इस मामले में पार्टी बनाया है। कंपनी का कहना है कि इस पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण उन्हें भारी नुकसान हो सकता है। हालांकि कंपनी ने कोर्ट में दी अपनी याचिका में एयर इंडिया की फ्लाइट पर रोक लगाने की मांग नहीं की है।

लेकिन ये जरूर कहा है कि किसी नई फ्लाइट को ये रूट इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। एल-अल एयरलाइन के अधिकारियों का कहना है कि अगर कोर्ट इस मामले में कोई आदेश जारी करता है तो इसका असर एयर इंडिया पर भी होगा। इस मामले में अब इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन से भी टिप्पणी देने को कहा गया है।
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