ईरान के राष्ट्रपति कार्यालय ने सोमवार को एक रिपोर्ट जारी कर इस देश की सबसे विवादित बहस को एक फिर भड़का दिया। तीन साल पुरानी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि आधे ईरानी, जिसमें महिलाएं और पुरुष दोनों शामिल हैं, जो महिलाओं को सार्वजनिक जगहों पर सिर ढकने के नियम से आजादी चाहते हैं। यह रिपोर्ट इस बीच आई है, जब पिछले हफ्ते ही दो फरवरी को बड़ी संख्या में महिलाओं ने जबरदस्ती हिजाब पहनाने के कानून का विरोध किया।
रिपोर्ट के मुताबिक 49.8 प्रतिशत ईरानी का मानना है कि इस्लामिक हिजाब निजी मामला है और सरकार को इसमें कुछ नहीं कहना चाहिए। यह भी माना जा रहा है कि राष्ट्रपति हसन रूहानी का इस मामले में रुख नरम है और वह देश के कट्टरपंथियों के खिलाफ हैं।
हालांकि अदालत ने हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले 29 लोगों की गिरफ्तारी का आदेश दिया था। अदालत का कहना था कि हिजाब का विरोध बचकाना हरकत है क्योंकि ईरान के ज्यादातर लोग हिजाब का समर्थन करते हैं। अदालत ने इसके खिलाफ प्रदर्शन करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की भी बात कही थी।
सरकार चाहती है हिजाब कानून को खत्म करना
2014 की इस रिपोर्ट को जारी करने से लग रहा है कि राष्ट्रपति इसे कट्टरपंथियों को चुनौती देने के एक मौके के रूप में देख रहे हैं। यह रिपोर्ट रूहानी के एक करीबी सलाहकार ने जारी की है। इसे राजनीतिक रूप से गुणा-भाग करने के बाद लिया गया फैसला माना जा रहा है, जिससे लगे कि वह सामाजिक सुधार का समर्थन कर रहे हैं। इससे अधिकारियों को भी संकेत मिलेगा और वे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया नहीं देंगे। सरकार यह दिखाना चाहती है कि हिजाब के खिलाफ कार्रवाई गैरकानूनी है और यह लोकतांत्रिक नहीं है। रूहानी भी महिलाओं के समर्थन में फैसले लेकर लोकप्रिय होना चाहते हैं।