ब्रिटेन की राजधानी लंदन में फलस्तीन समर्थक आंदोलन उस समय सुर्खियों में आ गया, जब पर्यावरण कार्यकर्ता Greta Thunberg को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। ग्रेटा उन कार्यकर्ताओं के समर्थन में प्रदर्शन कर रही थीं, जो हिरासत में लिए जाने के विरोध में भूख हड़ताल पर हैं। यह कार्रवाई ऐसे वक्त हुई है, जब पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को लेकर वैश्विक स्तर पर विरोध प्रदर्शन तेज हो रहे हैं।
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मध्य लंदन में हुए इस प्रदर्शन के दौरान ग्रेटा थनबर्ग फलस्तीन समर्थक संगठन ‘प्रिजनर्स फॉर फलस्तीन’ के साथ खड़ी नजर आईं। सोशल मीडिया पर साझा वीडियो में ग्रेटा भूख हड़ताल कर रहे कैदियों के समर्थन में तख्ती पकड़े दिखीं। ये कैदी ‘फलस्तीन एक्शन’ संगठन से जुड़े बताए जा रहे हैं, जिसे ब्रिटिश सरकार ने इस साल की शुरुआत में प्रतिबंधित संगठन घोषित किया था। इसी आधार पर पुलिस ने ग्रेटा को प्रतिबंधित संगठन के समर्थन के आरोप में हिरासत में लिया।
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प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई
यह प्रदर्शन केवल भूख हड़ताल तक सीमित नहीं था। इसी दौरान दो अन्य कार्यकर्ताओं ने लंदन के वित्तीय केंद्र में स्थित एक बीमा कंपनी के बाहर लाल रंग का पेंट छिड़क दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह कंपनी Elbit Systems से जुड़ी है, जो इस्राइल की रक्षा जरूरतों से संबंधित मानी जाती है। सिटी ऑफ लंदन पुलिस ने इस मामले में एक पुरुष और एक महिला को आपराधिक नुकसान के संदेह में गिरफ्तार किया, जबकि बाद में एक तीसरी महिला को प्रतिबंधित संगठन के समर्थन के आरोप में पकड़ा गया।
भूख हड़ताल और सरकार का रुख
‘प्रिजनर्स फॉर फलस्तीन’ के अनुसार, ‘फलस्तीन एक्शन’ से जुड़े आठ सदस्य बिना जमानत हिरासत में हैं और न्यायिक प्रक्रिया का इंतजार करते हुए भूख हड़ताल कर रहे हैं। इनमें से दो लोग पिछले 52 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और उनकी हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है। संगठन का कहना है कि उनकी जान को खतरा है। वहीं, ब्रिटिश सरकार ने इस मामले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा है कि जमानत और हिरासत से जुड़े फैसले अदालत का विषय हैं, न कि सरकार का।
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