ग्रीन पार्टी के समर्थक (फाइल फोटो)
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यूरोपीय यूनियन के संसदीय चुनाव में प्रमुख पार्टियों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। जहां पारंपरिक सत्ताधारी सेंट्रिस्ट गठबंधन के हाथ से बहुमत खो चुका है। वहीं, दक्षिणपंथी और पर्यावरण समर्थक पार्टियों ने विस्तार किया है।
यूरोपीय यूनियन का संसदीय चुनाव दुनिया के सबसे बड़े चुनावों में से एक है। यहां 28 देशों के 41.8 करोड़ मतदाता 751 सदस्य चुनते हैं। ये चुनाव उनकी तय प्रक्रिया के अनुसार होता है। पर्यावरण, लोकतंत्र और मानवाधिकार की पक्षधर ग्रीन पार्टी का पूरे यूरोप में प्रभाव बढ़ा है।
70 सीटों के साथ ग्रीन पार्टी चौथी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। ग्रीन पार्टी के बिना अब यूरोप की दशा और दिशा तय करना आसान नहीं होगा। इस बार यूरोपीय यूनियन के संसदीय चुनाव में 51 फीसदी लोगों ने वोट किया जो पिछली साल से आठ फीसदी ज्यादा है।
आबादी के हिसाब से हर देश को सीटें आवंटित हैं। बता दें कि सदस्यों का कार्यकाल पांच साल होता है। 2014 में यूरोपीय कमीशन का अध्यक्ष ईपीपी का था। 2019 के चुनाव में किसी गठबंधन के पास बहुमत नहीं है। अध्यक्ष कौन होगा? उसे कौन समर्थन देंगे? इसी से यूरोपीय संघ की प्राथमिकता तय होगी।
बता दें कि चुनाव से पहले यूरोपियन पीपुल्स पार्टी (ईपीपी) और डेमोक्रेटिक (एस एंड डी) के पास 54 फीसदी सीटें थीं। अब ये 43 फीसदी रह गई हैं। इन दोनों दलों ने 70 सीटें खोई हैं। दोनों पार्टियां दो दशक से बहुमत में थीं।