पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के राज्यपाल ने गुरुवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई। इसमें खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में बिगड़ रही कानून व्यवस्था पर चिंता जताई गई। बैठक में 16 प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वहीं पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने बैठक का बहिष्कार किया। साथ ही बैठक बुलाने पर आपत्ति जताई।
राज्यपाल कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि राज्यपाल फैसल करीम कुंदी की ओर से बुलाई गई बैठक में राज्य में शांति स्थापित करने, सुरक्षा स्थिति को बढ़ाने और प्रांत के सामने आने वाली वित्तीय चुनौतियों से निपटने समेत कई मुद्दों पर चर्चा की गई। कुंदी ने 14 सूत्री संयुक्त घोषणापत्र पेश किया। इसमें राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताई गई। इसमें कहा गया कि केंद्र और राज्य सरकारें कानून और व्यवस्था बनाए रखने में विफल रही हैं।
बैठक में प्रांत के वित्तीय और राजनीतिक हितों की रक्षा के लिए राजनीतिक समिति और एक तकनीकी समिति की भी स्थापना की गई। इसके अलावा घोषणापत्र में अप्रतिबंधित व्यापार के लिए पाक-अफगान सीमा पर सभी ऐतिहासिक व्यापार मार्गों को फिर से खोलने का आह्वान किया गया।
वहीं पीटीआई नेता और खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर के सूचना सलाहकार बैरिस्टर सैफ ने कहा कि पाकिस्तानी संविधान के 18वें संशोधन के तहत कार्यकारी शक्तियां मुख्यमंत्री के पास हैं। अगर मुख्यमंत्री के पास ये शक्तियां हैं तो सर्वदलीय बैठक क्यों बुलाई गई? उन्होंने कहा कि बैठक का उद्देश्य राजनीतिक लाभ के अलावा और कुछ नहीं है।
उन्होंने कहा कि समितियां गठित करने की कोई जरूरत नहीं है। प्रांत के अधिकारों की सुरक्षा के लिए गवर्नर कुंदी को केंद्र सरकार से संपर्क करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि पिछले साल खैबर पख्तूनख्वा को आतंक से निपटने के लिए 93 अरब रुपये मिले थे, जबकि 106 अरब रुपये विलय किए गए जिलों पर खर्च किए गए। उन्होंने कहा कि खैबर पख्तूनख्वा को नए जिलों के लिए जनसंख्या के आधार पर तय किए गए हिस्से के हिसाब से केंद्र सरकार ने धन मुहैया नहीं कराया।
सैफ ने कहा कि मुख्यमंत्री गंडापुर ने इन मुद्दों को हल करने के लिए व्यावहारिक कदम उठाए हैं। विलय किए गए जिलों में पुलिस की क्षमता बढ़ाने के लिए सात अरब रुपये आवंटित किए गए हैं और पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री ने आतंकवाद निरोधक विभाग के लिए एक अरब रुपये मंजूर किए हैं।
पाकिस्तानी सेना ने किया भड़काऊ भाषण रोकने के लिए कानून बनाने का आह्वान
पाकिस्तानी सेना ने सशस्त्र बलों को निशाना बनाकर फैलाए जा रहे दुष्प्रचार और गलत सूचना पर गुरुवार को चिंता व्यक्त की। सेना ने सरकार से भड़काऊ भाषण रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की मांग की। सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने कहा कि यह मांग रावलपिंडी स्थित जनरल मुख्यालय में सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की अध्यक्षता में आयोजित 84वें फॉर्मेशन कमांडर्स सम्मेलन के दौरान की गई। फोरम ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार जहर उगलने, झूठ बोलने और ध्रुवीकरण के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अनियंत्रित और अनैतिक उपयोग को रोकने के लिए कड़े कानून और नियम बनाए। राजनीतिक और वित्तीय हितों के लिए फर्जी खबरें फैलाने वालों की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें न्याय के दायरे में लाया जाए। सम्मेलन में आतंकवाद विरोधी अभियानों पर भी चर्चा की गई। आतंकवादियों और उनके मददगारों को बेअसर करने का संकल्प लिया गया।