श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं। एक रिपोर्ट में उन पर सामूहिक कब्रों के पुलिस रिकॉर्ड को नष्ट करने का आरोप लगा है।
श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं। एक रिपोर्ट में उन पर सामूहिक कब्रों के पुलिस रिकॉर्ड को नष्ट करने का आरोप लगा है। सामूहिक कब्रें उस जगह मिली थी जहां 1989 में हिंसक मार्क्सवादी विद्रोह हुए थे और उस दौरान यहां गोटबाया एक सैन्य अधिकारी के रूप में काम कर कर रहे थे।
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सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स डेवलपमेंट (सीएचआरडी), इंटरनेशनल ट्रूथ एंड जस्टिस प्रोजेक्ट (आईटीजेपी), जर्नलिस्ट्स फॉर डेमोक्रेसी इन श्रीलंका और फैमिलीज ऑफ द डिसएपियर्ड सामाजिक कार्यकर्ताओं के संगठनों द्वारा जारी रिपोर्ट उन पर आरोप लगाए गए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन अज्ञात सामूहिक कब्र में अब भी हजारों शव दफन हो सकते हैं जिनका पता नहीं चला है। रिपोर्ट के अनुसार, श्रीलंकाई सरकारों द्वारा स्थापित कई जांच आयोगों में से किसी को भी सामूहिक कब्र की जांच करने का आदेश नहीं दिया गया। इसके बजाय, सच्चाई को उजागर करने के प्रयासों को अवरुद्ध किया गया।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि सामूहिक कब्र खोदने में राजपक्षे की कथित भूमिका राजनीतिक हस्तक्षेप का एक उदाहरण थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि राजपक्षे उस समय एक शक्तिशाली रक्षा अधिकारी थे। आरोप हैं कि उन्होंने 2013 में मध्य श्रीलंका के मटाले जिले में सामूहिक कब्र की खोज के बाद क्षेत्र के पुलिस थानों में पांच साल से अधिक पुराने सभी पुलिस रिकॉर्ड को नष्ट करने का आदेश दिया था।