दुनिया की टॉप टेक कंपनियों में शुमार गूगल में भी कर्मचारियों ने एक यूनियन बना लिया है। ये यूनियन कर्मचारियों के बेहतर वेतन, नौकरी की सुविधाओं, अच्छा वर्क कल्चर के लिए काम करेगा।
अमेरिका की श्रम नियामक संस्था ने गूगल पर आरोप लगाया है कि वो कर्मचारियों से गैरकानूनी तरीके से पूछताछ कर रहा है। इनमें से कई लोगों ने कंपनी की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया था और एक संगठन बनाने की कोशिश की थी। इसके बाद इन्हें नौकरी से निकाल दिया गया था।
हालांकि गूगल का पक्ष है कि उसे यकीन है कि उसकी ओर से उठाए गए सभी कदम वैध हैं। बता दें कि टेक इंडस्ट्री जहां पेशेवर दक्षता, टारगेट और परफॉर्मेंस का बोलबाला रहता है, वहां पर लेबर यूनियन का बनना एक अहम घटनाक्रम है।
मुद्दे: वेतन ही नहीं, कई अन्य विवाद
सॉफ्टवेयर कंपनियों में कम वेतन मुद्दा नहीं, क्योंकि यहां अच्छा वेतन मिलता है। लेकिन कर्मचारियों और प्रबंधन में अक्सर समाज, राजनीति और वैचारिक विवाद सामने आते रहे हैं। इनमें यौन शोषण और कार्यस्थल पर विविधता व भेदभाव शामिल है। गूगल में यूनियन द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसके नैतिक उपयोग, खुद चलने वाली कारों और इंटरनेट सर्च परिणामों में भेदभाव जैसे मुद्दों को प्रबंधन के सामने उठाने का अनुमान लगाया जा रहा है।
पहले भी दिखाया है संगठन का जज्बा