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Conflict: शांति की उम्मीदों के साथ संदेह की गहरी छाया, ट्रंप की शैली और छवि पर विश्व मीडिया की राय जुदा-जुदा

Sun, 17 Aug 2025 05:56 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

रूस और यूक्रेन के बीच के संघर्ष को खत्म करने के उद्देश्य से शुक्रवार को अलास्का में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अहम वार्ता हुई। अब इस वार्ता को अमेरिकी मीडिया ने साहसिक लेकिन जोखिमभरा बताया, जबकि रूसी मीडिया ने पुतिन की कूटनीतिक जीत करार दी। ऐसे में ठोस समझौते की गैरमौजूदगी ने विशेषज्ञों को यह कहने का मौका दिया कि यह वार्ता सिर्फ फोटो-ऑप थी।

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ट्रंप और पुतिन। - फोटो : PTI
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विस्तार
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अलास्का में डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई बातचीत को वैश्विक मीडिया शांति की दिशा में बहुत भरोसे के साथ नहीं देख रहा है। दोनों नेताओं ने भले वार्ता को सकारात्मक व रचनात्मक करार दिया, लेकिन अमेरिकी मीडिया ने इसे साहसिक लेकिन जोखिमभरा प्रयास बताया। रूसी मीडिया ने पुतिन की कूटनीतिक जीत का सबूत माना, यूरोपीय मीडिया ने उम्मीद और आशंका दोनों जताईं। वहीं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और घरेलू अमेरिकी राजनीतिक हलकों में चर्चा का बड़ा हिस्सा राष्ट्रपति ट्रंप की व्यक्तिगत शैली और उनकी मसखरे नेता जैसी छवि पर केंद्रित रहा।
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द न्यूयॉर्क टाइम्स ने उठाए सवाल
द न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपेक्षाकृत संशयपूर्ण रुख अपनाते हुए रिपोर्ट में सवाल उठाया, क्या यह वार्ता सिर्फ फोटो-ऑप और अल्पकालिक सुर्खियां थी या वास्तव में संघर्षविराम की दिशा में ठोस कदम? अमेरिकी खुफिया व रक्षा हलकों में आशंका है कि पुतिन ने बैठक का इस्तेमाल वैश्विक मंच पर छवि सुधारने और यह दिखाने के लिए किया कि अमेरिका अंततः रूस से बातचीत करने को मजबूर है। ठोस समझौता न होना भी ट्रंप के आलोचकों को यह कहने का मौका देता है कि यह महज राजनीतिक तमाशा था।

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वॉशिंगटन पोस्ट ने बताया राजनीतिक दांव

वॉशिंगटन पोस्ट ने राजनीतिक दांव बताते हुए सवाल उठाया कि क्या ट्रंप का मूड-आधारित नेतृत्व अमेरिका की दीर्घकालिक रणनीति को कमजोर कर रहा है। दोनों अखबारों ने लिखा कि ट्रंप के फैसले मूड पर निर्भर हैं, आज खुश हों तो शांति की बात करेंगे, कल गुस्से में हों तो पलट जाएंगे। एमएसएनबीसी ने ट्रंप को रियलिटी शो का होस्ट करार दिया। कहा-नोबेल की चाह में बेकरार राजनेता वैश्विक मंच पर कोई भी ड्रामा कर सकता है। ट्रंप वैश्विक राजनीति को शोमैनशिप में बदल रहे हैं।

क्या कहती है सीएनएन की रिपोर्ट?
सीएनएन ने कहा ट्रंप शांति की ओर बढ़ रहे हैं, पर उनका अप्रत्याशित रुख सब पर भारी है। फॉक्स न्यूज ने इसे ऐतिहासिक शांति पहल कहकर सराहा। ब्रुकिंग्स संस्थान एवं काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस ने लिखा, यह वार्ता संभावना और जोखिम दोनों का मिश्रण है। ट्रंप ने बातचीत का द्वार खोला है, लेकिन उनकी नीतियों की स्थिरता पर गंभीर सवाल हैं।
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डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन में संघर्ष विराम पर कर रहे वार्ता। - फोटो : पीटीआई
उम्मीदें व आशंकाएं साथ-साथ: यूरोपीय मीडिया
ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने वार्ता को रणनीतिक विडंबना बताया। अखबार ने लिखा कि वार्ता ऐसे समय हुई, जब आर्कटिक क्षेत्र में रूस, अमेरिका और चीन के बीच प्रभुत्व की दौड़ तेज है। सुरक्षा विशेषज्ञों को यह कदम अमेरिका की आर्कटिक रणनीति में नरमी का संकेत लगता है। गार्जियन ने चेतावनी दी, ट्रंप की अप्रत्याशित कूटनीति से वार्ता के नतीजे भरोसेमंद नहीं माने जा सकते।

फ्रांस के ले मोंद ने लिखा, उम्मीद तो जगती है, पर डर है कि अमेरिका-रूस आपस में डील कर लेंगे और यूरोप को किनारे कर देंगे। ट्रंप और अमेरिका का इतिहास इस बात का साक्षी है। जर्मनी के फ्रैंकफर्टर अल्गेमाइने ने लिखा, यूरोप को वार्ता से बाहर रखना असुरक्षा की भावना बढ़ा रहा है। बीबीसी ने कहा, असली शांति अभी दूर है। डॉयचे वेले ने इसे राजनीतिक संकेतों की जीत बताया, लेकिन कहा कि जमीनी हालात में फिलहाल कोई बदलाव नहीं।

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पुतिन को केंद्र में लाने वाली वार्ता: रूसी मीडिया
रूस के अखबार इजवेस्टिया ने लिखा, ट्रंप को मानना पड़ा कि पुतिन के बिना यूक्रेन का भविष्य तय नहीं हो सकता। कोमर्सांट ने इसे रूस की कूटनीतिक वापसी बताया। टीवी चैनल आरटी ने भी बैठक को पुतिन की मजबूती और धैर्य का परिणाम करार दिया। लेकिन सभी ने ट्रंप की स्थिरता पर संदेह जताया है। रशियन इंटरनेशनल अफेयर्स काउंसिल ने कहा, बैठक रूस को वैश्विक कूटनीति का अपरिहार्य खिलाड़ी बनाकर पेश करती है।

शांति का संकेत, समाधान नहीं
इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप ने आकलन किया कि यह संवाद की शुरुआत है, समाधान का नहीं। ट्रंप के किसी भी निर्णय या किसी भी बात को अंतिम नहीं माना जा सकता। अलास्का वार्ता ने तत्काल युद्धविराम की राह नहीं खोली, पर अमेरिका व रूस की वैश्विक भूमिका को फिर रेखांकित किया। 
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