डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन में संघर्ष विराम पर कर रहे वार्ता।
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उम्मीदें व आशंकाएं साथ-साथ: यूरोपीय मीडिया
ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने वार्ता को रणनीतिक विडंबना बताया। अखबार ने लिखा कि वार्ता ऐसे समय हुई, जब आर्कटिक क्षेत्र में रूस, अमेरिका और चीन के बीच प्रभुत्व की दौड़ तेज है। सुरक्षा विशेषज्ञों को यह कदम अमेरिका की आर्कटिक रणनीति में नरमी का संकेत लगता है। गार्जियन ने चेतावनी दी, ट्रंप की अप्रत्याशित कूटनीति से वार्ता के नतीजे भरोसेमंद नहीं माने जा सकते।
फ्रांस के ले मोंद ने लिखा, उम्मीद तो जगती है, पर डर है कि अमेरिका-रूस आपस में डील कर लेंगे और यूरोप को किनारे कर देंगे। ट्रंप और अमेरिका का इतिहास इस बात का साक्षी है। जर्मनी के फ्रैंकफर्टर अल्गेमाइने ने लिखा, यूरोप को वार्ता से बाहर रखना असुरक्षा की भावना बढ़ा रहा है। बीबीसी ने कहा, असली शांति अभी दूर है। डॉयचे वेले ने इसे राजनीतिक संकेतों की जीत बताया, लेकिन कहा कि जमीनी हालात में फिलहाल कोई बदलाव नहीं।
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पुतिन को केंद्र में लाने वाली वार्ता: रूसी मीडिया
रूस के अखबार इजवेस्टिया ने लिखा, ट्रंप को मानना पड़ा कि पुतिन के बिना यूक्रेन का भविष्य तय नहीं हो सकता। कोमर्सांट ने इसे रूस की कूटनीतिक वापसी बताया। टीवी चैनल आरटी ने भी बैठक को पुतिन की मजबूती और धैर्य का परिणाम करार दिया। लेकिन सभी ने ट्रंप की स्थिरता पर संदेह जताया है। रशियन इंटरनेशनल अफेयर्स काउंसिल ने कहा, बैठक रूस को वैश्विक कूटनीति का अपरिहार्य खिलाड़ी बनाकर पेश करती है।
शांति का संकेत, समाधान नहीं
इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप ने आकलन किया कि यह संवाद की शुरुआत है, समाधान का नहीं। ट्रंप के किसी भी निर्णय या किसी भी बात को अंतिम नहीं माना जा सकता। अलास्का वार्ता ने तत्काल युद्धविराम की राह नहीं खोली, पर अमेरिका व रूस की वैश्विक भूमिका को फिर रेखांकित किया।