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कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न हुआ गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा चुनाव, मतगणना शुरू

पीटीआई, इस्लामाबाद Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 15 Nov 2020 08:31 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे

उत्तरी पाकिस्तान में गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों ने कड़ी सुरक्षा के बीच तीसरे विधानसभा चुनावों में हिस्सा लिया। इस दौरान कोविड-19 वैश्विक महामारी के चलते लोग मास्क लगाए और सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करते दिखे। वहीं, यहां चुनाव कराने की पाकिस्तान की योजना का भारत ने विरोध किया है।

मतदान सुबह आठ बजे शुरू हुआ और शाम पांच बजे शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया। वोटों की गिनती शुरू हो गई है और पूरा परिणाम कल तक आ सकता है। मतदान अधिकारियों ने कहा कि मतदान केंद्रों के अंदर मौजूद मतदाताओं को मतदान का समय समाप्त होने के बावजूद वोट डालने दिया गया। 




उन्होंने कहा कि 24 सीटों पर चुनाव होना था लेकिन एक सीट पर मतदान स्थगित होने के चलते अब 23 सीटों पर चुनाव हुआ। उन्होंने कहा कि इन सीटों पर चार महिलाओं समेत कुल 330 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। 2010 में राजनीतिक सुधार लागू होने के बाद विधानसभा का यह तीसरा चुनाव है।

उधर, भारत ने गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव कराने के इस फैसले को लेकर पाकिस्तान की निंदा की है। भारत ने कहा है कि सैन्य कब्जे वाले क्षेत्र की स्थिति को बदलने के लिए की गई किसी भी कार्रवाई का कोई कानूनी आधार नहीं है। यह शुरू से ही अमान्य है और इसे लेकर हमारी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे
उत्तरी पाकिस्तान में गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों ने कड़ी सुरक्षा के बीच तीसरे विधानसभा चुनावों में हिस्सा लिया। इस दौरान कोविड-19 वैश्विक महामारी के चलते लोग मास्क लगाए और सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करते दिखे। वहीं, यहां चुनाव कराने की पाकिस्तान की योजना का भारत ने विरोध किया है।

मतदान सुबह आठ बजे शुरू हुआ और शाम पांच बजे शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया। वोटों की गिनती शुरू हो गई है और पूरा परिणाम कल तक आ सकता है। मतदान अधिकारियों ने कहा कि मतदान केंद्रों के अंदर मौजूद मतदाताओं को मतदान का समय समाप्त होने के बावजूद वोट डालने दिया गया। 


उन्होंने कहा कि 24 सीटों पर चुनाव होना था लेकिन एक सीट पर मतदान स्थगित होने के चलते अब 23 सीटों पर चुनाव हुआ। उन्होंने कहा कि इन सीटों पर चार महिलाओं समेत कुल 330 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। 2010 में राजनीतिक सुधार लागू होने के बाद विधानसभा का यह तीसरा चुनाव है।

उधर, भारत ने गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव कराने के इस फैसले को लेकर पाकिस्तान की निंदा की है। भारत ने कहा है कि सैन्य कब्जे वाले क्षेत्र की स्थिति को बदलने के लिए की गई किसी भी कार्रवाई का कोई कानूनी आधार नहीं है। यह शुरू से ही अमान्य है और इसे लेकर हमारी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है।

भारत ने किया विरोध, चुनाव को बताया अमान्य

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने सितंबर में एक डिजिटल प्रेस ब्रीफिंग में कहा था कि सैन्य कब्जे वाले तथाकथित 'गिलगित-बाल्टिस्तान' में स्थिति को बदलने के लिए पाकिस्तान की ओर से की जाने वाली किसी भी कार्रवाई का कोई कानूनी आधार नहीं है और यह शुरू से ही अमान्य है।

श्रीवास्तव ने कहा था कि इस मामले में हमारी स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट और सतत है। केंद्र शासित प्रदेशों, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के तहत आने वाला समस्त क्षेत्र भारत का अभिन्न अंग था, भारत का अभिन्न अंग है और आगे भी भारत का अभिन्न अंग रहेगा, इसे लेकर कोई भी विवाद या दावा स्वीकार्य नहीं है। 

1141 मतदान केंद्रों में से 297 अतिसंवेदनशील

यहां कुल 1141 मतदान केंद्रों में से 577 को संवेदनशील व 297 को अतिसंवेदनशील घोषित किया गया था। गिलगित-बाल्टिस्तान, पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा, सिंध और बलूचिस्तान से 15 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों को मतदान केंद्रों पर तैनात किया गया था। हालांकि सैन्य कर्मियों की तैनाती नहीं की गई।

विशेषज्ञों ने यहां पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन), पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के बीच कड़े त्रिकोणीय मुकाबले का अनुमान लगाया है। परंपरागत रूप से देखा जाए तो केंद्र में सत्ताधारी दल ही गिलगित- बाल्टिस्तान में चुनाव जीतता है।

उल्लेखनीय है कि पीपीपी ने इन चुनावों में 23 उम्मीदवार उतारे हैं जबकि पीएमएल-एन ने 21 प्रत्याशियों पर दांव लगाया है। वहीं, पीटीआई ने दो सीटों पर स्थानीय दलों के साथ गठबंधन किया है और शेष सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। बता दें कि इस क्षेत्र में शिया मुसलमानों की खासी आबादी है।
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