इस्राइल और हमास के बीच चल रहे युद्ध को लेकर अब अंतरराष्ट्रीय दबाव तेजी से बढ़ रहा है। बढ़ते वैश्विक दबाव के बीच इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को कहा कि यदि बचे हुए बंधकों को रिहा कर दिया जाए और हमास हथियार छोड़ दे, तो वह युद्ध समाप्त करने को तैयार हैं। नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका समेत कई करीबी सहयोगी देशों ने गाजा में जारी सैन्य कार्रवाई और वहां भूखमरी की स्थिति पर गहरी चिंता जताई है।
यह भी पढ़ें -
US-Russia: ट्रंप-पुतिन के बीच दो घंटे फोन पर चर्चा, रूसी राष्ट्रपति ने कहा- समझौते के बाद ही युद्धविराम संभव
अमेरिका से चेतावनी: 'युद्ध खत्म करो, नहीं तो समर्थन वापस'
वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रतिनिधियों ने इस्राइल को चेताया है कि यदि युद्ध नहीं रोका गया, तो अमेरिका अपना समर्थन वापस ले सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, एक सूत्र ने बताया, ट्रंप के लोग इस्राइल को बता रहे हैं- अगर आपने युद्ध नहीं रोका, तो हम आपको छोड़ (समर्थन देने से इनकार) देंगे।'
हाल ही में अमेरिकी-इस्राइली सैनिक एडन अलेक्जेंडर की रिहाई भी अमेरिका और हमास के बीच सीधे बातचीत के बाद हुई, जिसमें इस्राइल शामिल नहीं था। इसके बाद व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा, 'राष्ट्रपति चाहते हैं कि गाजा का युद्ध अब समाप्त हो।' वहीं ट्रंप ने अपनी पश्चिम एशिया की यात्रा के दौरान भी कहा, 'गाजा में लोग भूख से मर रहे हैं। बहुत भयानक हालात हैं। मैंने अप्रैल में नेतन्याहू से कहा था कि गाजा में खाने और दवाइयों की आपूर्ति बढ़ाई जाए।'
'अमेरिकी अधिकारी ने रिपोर्ट को बताया झूठा'
हालांकि इस्राइली मीडिया में द वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट पर संदेह जताया गया है। टाइम्स ऑफ इस्राइल से बातचीत में एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा, 'हमें यरुशलम से कई मामलों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इस्राइल को छोड़ने की बात बिल्कुल गलत है।' अधिकारी ने यह भी कहा कि अमेरिकी-इस्राइली सैनिक की रिहाई किसी 'गुप्त सौदे' का हिस्सा नहीं थी, बल्कि यह हमास की ओर से अच्छे इरादे की पहल थी। अमेरिका के इस्राइल में राजदूत माइक हकाबी ने भी द वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट को निराधार बताते हुए कहा, उन्हें राष्ट्रपति की बात सुननी चाहिए, ना कि किसी अनजान सूत्र की।'
ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा ने भी इस्राइल को चेताया
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी सोमवार को इस्राइल की आलोचना की और संयुक्त बयान में चेतावनी दी कि अगर सैन्य कार्रवाई नहीं रुकी और मानवीय मदद की अनुमति नहीं दी गई, तो कड़े कदम उठाए जाएंगे। इन नेताओं ने नेतन्याहू सरकार के कुछ मंत्रियों की ओर से दिए गए फलस्तीनियों के सामूहिक विस्थापन वाले बयानों की भी निंदा की। उन्होंने यह भी कहा, हम एक स्वतंत्र फलस्तीनी राज्य को मान्यता देने के लिए तैयार हैं, ताकि दो-राष्ट्र समाधान की दिशा में कदम बढ़ाया जा सके।
यह भी पढ़ें -
Israel: ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा पर बिफरे नेतन्याहू, गाजा में इस्राइली सेना की कार्रवाई का विरोध करने पर भड़के
नेतन्याहू का यू-टर्न: भूखमरी पर पहली बार सार्वजनिक चिंता
लगातार अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बाद पीएम नेतन्याहू ने पहली बार गाजा में भूखमरी की स्थिति को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया। अपने टेलीग्राम चैनल पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में उन्होंने कहा-'हमें गाजा की आबादी को भूखमरी की ओर नहीं धकेलना चाहिए - व्यावहारिक और कूटनीतिक दोनों कारणों से।' उन्होंने कहा कि इस्राइल अब सीमित मात्रा में खाद्य सहायता को गाजा में प्रवेश करने देगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहला मौका है जब इस्राइल ने सार्वजनिक रूप से भूखमरी के संकट को स्वीकार किया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां महीनों से इस पर चेतावनी दे रही थीं। 2 मार्च से इस्राइल ने गाजा की पूरी नाकाबंदी कर दी थी ताकि हमास पर दबाव डाला जा सके।