दो साल पहले 55 वर्षीय गजाला हाशमी को अमेरिका से बाहर निकाले जाने का डर सताने लगा था। 2017 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक घोषणा कर दी कि वह कुछ मुस्लिम देशों के शरणार्थियों पर बैन लगाने वाले हैं।
गजाला हाशमी भारत के हैदराबाद में पैदा हुईं थीं, लेकिन चार साल की उम्र में वह अमेरिका आ गई थीं। बचपन में उन्हें परिवार वाले 'मुन्नी' कहकर बुलाते थे। उन्होंने चुनावों में बड़ा उलटफेर करते हुए रिपब्लिकन पार्टी के ग्लेन स्टुअर्टवेंट को मात दे दी। उनकी जीत की वजह से पहली बार डेमोक्रेट्स सत्ता में आ पाए हैं। गजाला ने जॉर्जिया दक्षिणी विश्वविद्यालय से बीए की डिग्री हासिल करने के बाद इमोरी यूनिवर्सिटी से उन्होंने पीएचडी किया था। 1991 में हाशमी और उनके पति अजहर रिचमंड में शिफ्ट हो गए थे।
साहित्य की पूर्व प्रोफेसर और सामुदायिक कॉलेज की प्रशासक गजाला हाशमी ने चुनावों में शिक्षा, बंदूकों पर नियंत्रण और स्वास्थ्य सेवाएं सुधारने को मुद्दा बनाया। वर्जिनिया की पहली मुस्लिम महिला सीनेटर बनने से वह खुश हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, 'अमेरिका के मुस्लिम भी अन्य मुस्लिमों की तरह ही हैं।' साल 2016 से 300 से ज्यादा मुस्लिम उम्मीदवार चुनावों में अपना भाग्य आजमा चुके हैं। इनमें करीब 100 महिला उम्मीदवार थीं।