रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपने आधिकारिक दौरे पर जर्मनी पहुंचे, जहां उन्होंने बर्लिन में भारतीय समुदाय के एक कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारत-जर्मनी संबंधों, भारतीय प्रवासी समुदाय की भूमिका, आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक जुड़ाव पर विस्तार से बात की।
रक्षा मंत्री ने कार्यक्रम के बाद सोशल मीडिया पर कहा कि बर्लिन में भारतीय समुदाय के सदस्यों से बातचीत कर उन्हें बेहद खुशी हुई। उन्होंने भारतीय प्रवासी समुदाय को भारत और जर्मनी के बीच लिविंग ब्रिज बताया और कहा कि हाल के वर्षों में यह समुदाय एक मजबूत शक्ति के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान उन्होंने भारत की तेज आर्थिक प्रगति और तकनीकी विकास को रेखांकित किया, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप्स, अंतरिक्ष और डिजिटल इनोवेशन जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले सात दशकों में भारत और जर्मनी के संबंध हर क्षेत्र में मजबूत हुए हैं। आज जर्मनी यूरोप में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारत में 2,000 से अधिक जर्मन कंपनियां सक्रिय हैं और जर्मनी की अग्रणी कंपनियां भारत के औद्योगिक विकास व मेक इन इंडिया अभियान को गति दे रही हैं। दूसरी ओर, कई भारतीय कंपनियां भी जर्मनी में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही हैं।
उन्होंने कहा कि भारत और जर्मनी के राजनीतिक व कूटनीतिक संबंधों के द्वार भले ही सरकारों के हाथ में हों, लेकिन दोनों देशों के रिश्तों की असली मजबूती लोगों के आपसी जुड़ाव से तय होती है। उन्होंने भारतीय समुदाय से कहा कि इस पुल को मजबूत बनाने में उनकी भूमिका बेहद अहम है। राजनाथ सिंह ने बताया कि जर्मनी में भारतीयों की संख्या 3.7 लाख है और यह लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय समुदाय की उपलब्धियों और योगदान ने जर्मनी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि यह उनकी जर्मनी की पहली आधिकारिक यात्रा है और वह वहां के रक्षा मंत्री के निमंत्रण पर पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि यह अपने आप में एक उपलब्धि है कि समय के साथ भारत और जर्मनी के रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 भारत और जर्मनी के लिए विशेष है, क्योंकि इस वर्ष दोनों देशों के औपचारिक राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे हो गए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते पूरी तरह लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित हैं।
उन्होंने आगे कहा कि भारत और जर्मनी केवल राजनीतिक और रणनीतिक संबंध ही साझा नहीं करते, बल्कि कला और संस्कृति के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच गहरा उत्साह और जुड़ाव है। राजनाथ सिंह ने बताया कि उन्हें हम्बोल्ट विश्वविद्यालय जाने का अवसर मिला, जहां उन्होंने रवीन्द्रनाथ टैगोर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए।
कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि यह उनकी जर्मनी की पहली यात्रा है, जबकि वह अमेरिका सात से आठ बार जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद वह दो बार अमेरिका जा चुके हैं। इस पर श्रोताओं के हंसने पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्हें समझ नहीं आया कि लोग क्यों हंस रहे हैं, जबकि वह तो सभी से मिलकर प्रसन्न हैं।
राजनाथ ने पश्चिम एशिया संकट के बीच विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों की वापसी को लेकर कहा कि सरकार ने स्वदेश लौटना चाहने वालों के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को वापस लाने के लिए विमानों की भी व्यवस्था की गई है और जरूरतमंद भारतीय नागरिक संबंधित भारतीय दूतावासों से संपर्क कर सकते हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान भी सरकार ने विदेशों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने का काम किया था और मौजूदा संकट में भी सरकार पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भारतीय के जीवन पर संकट है, तो वह भारत लौट सकता है।
पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर राजनाथ सिंह ने कहा कि इस संकट का भारत पर सबसे कम असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि कच्चा तेल, ऊर्जा, एलपीजी और अन्य आवश्यक वस्तुओं का देश में पर्याप्त भंडार मौजूद है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के निर्देश पर वरिष्ठ मंत्रियों की एक समिति बनाई गई है, जिसकी अध्यक्षता वह स्वयं कर रहे हैं। यह समिति हर सप्ताह बैठक कर स्थिति की समीक्षा करती है। रक्षा मंत्री ने कहा कि फिलहाल कोई विशेष समस्या नहीं है और सरकार हर हालात पर नजर बनाए हुए है।