चीन भले ही यह कहे कि उसकी नीतियां विस्तारवादी नहीं हैं लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है। चीन के कारोबारी जर्मनी की कई कंपनियों के अधिग्रहण की फिराक में हैं। इसे लेकर जर्मनी को अपने देश की बड़ी कंपनियां चीनी हाथों में जाने से बचाने के लिए नए कानून तक बनाने पड़ गए हैं।
चीन से बचने के लिए नई स्थायी समिति तब हरकत में आएगी जब सुरक्षा संबंधी तकनीक बनाने वाली किसी जर्मन कंपनी को अधिग्रहण से बचाने का अन्य विकल्प ना बचा हो। ऐसे में सरकार द्वारा कंपनी में अस्थायी हिस्सेदारी खरीदी जाएगी और यह काम सरकारी विकास बैंक, केएफडब्ल्यू करेगा। स्थायी समिति विकास बैंक के साथ काम जरूर करेगी लेकिन इसकी मदद से सरकार कंपनियों में हिस्सेदारी नहीं करेगी।
यूरोपीय संघ (ईयू) भी चीन के साथ अपने औद्योगिक नीति पर पुनर्विचार कर रहा है और इसी सोच के तहत जर्मन कंपनियों में चीनी निवेश को लेकर सावधानी बरतने की कोशिश हो रही है। 2016 में चीन की मीडिया नाम की कंपनी ने बवेरिया की औद्योगिक रोबोट बनाने वाली कंपनी कूका का अधिग्रहण किया था। इसके बाद से जर्मन राजनेता ऐसे सौदों को लेकर काफी सजग हो गए है।