जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज आज एक दिनी यात्रा पर चीन पहुंच रहे हैं। विश्व के सात प्रमुख औद्योगिक देशों के समूह (G7) के किसी नेता की बीते तीनों सालों में चीन की यह पहली यात्रा है। उनकी यात्रा से जर्मनी में विवाद भी पैदा हो गया है। विपक्षी दल इस यात्रा का विरोध कर रहे हैं।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार यात्रा के दौरान शोल्ज चीन की राजधानी बीजिंग में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली केकियांग से मुलाकात करेंगे। शोल्ज की यह यात्रा ऐसे समय पर हो रही है जब दुनिया भर में सेमीकंडक्टर की किल्लत है। सेमीकंडक्टर निर्यात को लेकर चीन पर लगाए अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण यह पूरा उद्योग संकट में है।
अमेरिकी पाबंदी से अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की कंपनियों को भी नुकसान हो रहा है। अमेरिका ने यह कदम चीन की तकनीक और सैन्य महत्वाकांक्षाओं को रोकने के इरादे से किया है। सेमी कंडक्टर्स का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, आटो मोबाइल, अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों आदि में किया जाता है।
चीन से जुड़े हैं जर्मनी व यूरोप के आर्थिक हित
जर्मन चांसलर शोल्ज के साथ देश के शीर्ष अधिकारियों की एक टीम भी बीजिंग पहुंच रही है। उनकी यात्रा का अर्थ है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश चीन के साथ उनका देश व्यापार जारी रखना चाहता है। यह यात्रा लगभग तीन वर्षों में किसी G7 नेता द्वारा चीन की पहली यात्रा है। यह जर्मनी में गहराती मंदी के बीच हो रही है। यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश जर्मनी के आर्थिक हित अभी भी बीजिंग से बहुत अधिक जुड़े हुए हैं।
12 जर्मन उद्योगपतियों का समूह बीजिंग जा रहा
शोल्ज की चीन यात्रा से जुड़े एक जर्मन अधिकारी के अनुसार उनके साथ 12 जर्मन उद्योगपतियों का समूह बीजिंग जा रहा है। इसमें वॉक्सवैगन (VLKAF), ड्यूश बैंक (DB), सीमेंस (SIEGY) और केमिकल्स की दिग्गज कंपनी बॉस्फ (BASFY) के सीईओ शामिल हैं।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता चाओ लिचिएन ने एक नवंबर को बीजिंग में कहा था कि इस वर्ष चीन और जर्मनी के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 50वीं वर्षगांठ है। दोनों देश व्यापक रणनीतिक साझेदार हैं। मौजूदा यात्रा कोरोना काल के बाद से किसी यूरोपीय नेता द्वारा चीन की पहली यात्रा है। शोल्ज के चांसलर बनने के बाद उनकी यह पहली चीन यात्रा भी है।