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दुनिया भर में फूट रहा नस्लवाद के खिलाफ गुस्सा, भारतवंशी संगठन भी उठाएगा आवाज

Fri, 12 Jun 2020 07:08 AM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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नस्लवाद के खिलाफ प्रदर्शन - फोटो : PTI
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राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि देश के सैन्य ठिकानों का नाम बदलना तो दूर, इस पर सोचा तक नहीं जाएगा, क्योंकि ये महान अमेरिकी विरासत हैं। अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस हिरासत में मौत के बाद अश्वेतों के समर्थन में हो रहे प्रदर्शनों के बीच कुछ लोग इन ठिकानों का नाम अमेरिकी अफसरों के नाम पर रखने को नस्लभेदी बता रहे हैं।

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अटकलें थी कि सरकार अमेरिकी सिविल वॉर योद्धा कॉन्फेडरेट सैन्य जनरल के नाम वाले ठिकानों का नाम बदल सकती है। लेकिन ट्रंप ने ट्वीट किया है कि ये नाम हमारी विरासत का हिस्सा हैं और आजादी के इतिहास का संकेत हैं। इनके साथ छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।

  •  कॉन्फेडरेट सैन्य अफसरों की मूर्तियां नफरत फैलाने वाली : पेलोसी

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैंसी पेलोसी ने कॉन्फेडरेट सैन्य अफसरों की मूर्तियां हटाने की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों से जुड़ी धरोहर नहीं होने चाहिए, जिन्होंने सिर्फ नस्लभेद करने के लिए क्रूरता को सही ठहराया। उनकी मूर्तियां नफरत को याद दिलाने वाली हैं, विरासत नहीं। इन्हें हटाया जाना चाहिए।

  •  नस्लवाद के विरुद्ध काम करेगा भारतवंशी संगठन

46 वर्षीय अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के बाद एक भारतीय-अमेरिकी संगठन ‘इंडियास्पोरा’ ने अफ्रीकी-अमेरिकी और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के साथ मिलकर काम करने का संकल्प लिया है। संगठन ने कहा, अफ्रीकी-अमेरिकी समुदाय का संघर्ष हमारा भी है। नस्लीय उत्पीड़न से हम भी अप्रभावित नहीं रह सकते। इसलिए हमें और काम करना होगा।

  • अखबार मालिकों का नस्ली कार्टून के विरुद्ध इस्तीफा

अमेरिका में मिसूरी राज्य के एक अखबार के सह-मालिकों ने एक नस्लीय कार्टून के प्रकाशन के बाद इसके विरोध में अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। ‘वाशिंगटन मिसूरियन’ में प्रकाशित इस कार्टून में पुलिस की फंडिंग में कटौती की प्रशंसा करते हुए एक अश्वेत शख्स को एक श्वेत महिला का पर्स झपटते हुए दिखाया गया है। अखबार के मालिक और सुजैन मिलर व जीन मिलर वुड बहनों ने इस पर माफी भी मांगी है।

  • लियोपोल्ड द्वितीय की शोषण भरी नीति की आलोचना

अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉएड की मौत के बाद शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब कई यूरोपीय देशों में भी फैल गए हैं। यहां पर कांगो में प्रशासन के दौरान लियोपोल्ड द्वितीय की अत्याचारों और शोषण से भरी नीति की आलोचना की गई। ब्रुसेल्स में प्रदर्शनकारियों ने राजा लियोपोल्ड द्वितीय की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाते हुए उसकी आंखों व हाथों में लाल रंग पोत दिया।

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