अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस ने हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ मिलकर भारतीय वायु सेना के लड़ाकू जेट विमानों के लिए इंजन बनाने के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। कैबिनेट की सुरक्षा समिति (सीसीएस) ने इस साल 30 अगस्त को एलसीए मार्क-2 लड़ाकू विमान के निर्माण की मंजूरी दी थी।
भारत में रक्षा क्षेत्र को मजबूती देने के लिए हल्के लड़ाकू विमान(एलसीए) मार्क2 और पहले दो स्वदेशी उन्नत मध्यम दर्जे के लड़ाकू विमान (एएमसीए) का इंजन का उत्पादन अब देश में ही होगा। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के प्रमुख डॉ, समीर वी कामत ने शनिवार को बताया कि अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस और हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड मिलकर इनके इंजन का निर्माण करेंगे। अमेरिका से इसकी सभी मंजूरी मिल गई है।
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अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस ने हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ मिलकर भारतीय वायु सेना के लड़ाकू जेट विमानों के लिए इंजन बनाने के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। कैबिनेट की सुरक्षा समिति (सीसीएस) ने इस साल 30 अगस्त को एलसीए मार्क-2 लड़ाकू विमान के निर्माण की मंजूरी दी थी। यह विमान चरणबद्ध तरीके से मिराज 2000, जगुआर और मिग-29 लड़ाकू विमान का स्थान लेगा। एलसीए मार्क2 का निर्माण 2027 तक कर लिया जाएगा।
भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान विनिर्माण में जीई की भागीदारी अमेरिकी कंपनी जीई ने 1986 में एफ404 इंजन के साथ भारत के हल्के लड़ाकू विमान के विकास के लिए हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ काम करना शुरू किया।