आर्थिक पुनर्निर्माण और निवेश
ट्रंप की योजना का तीसरा स्तंभ गाजा की बर्बाद अर्थव्यवस्था को खड़ा करना है। ट्रंप ने अरब देशों, अमेरिका और यूरोपीय संघ से फंडिंग की बात कही है। इसके तहत 'गाजा रिकंस्ट्रक्शन फंडट बनाया जाएगा, जिसमें अरब खाड़ी देश और अंतरराष्ट्रीय संस्थान निवेश करेंगे। इंफ्रास्ट्रक्चर (बिजली, पानी, अस्पताल, स्कूल, पोर्ट, एयरपोर्ट) पर भारी निवेश का खाका है। ट्रंप इसे 'बिजनेस-ड्रिवेन पीस (व्यवसाय-संचालित शांति)' कह रहे हैं- यानि, विकास से आतंक और अस्थिरता को पीछे धकेलना।
फलस्तीन का भविष्य और राज्य का सवाल
इस योजना में दो-राष्ट्र समाधान का संकेत तो है, लेकिन बहुत अस्पष्ट। फलस्तीन को भविष्य में राज्य का दर्जा देने पर विचार होगा, लेकिन पहले शांति और स्थिर शासन जरूरी बताया गया है। इस्राइल की सुरक्षा चिंताओं को प्राथमिकता दी गई है।
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गाजा शांति योजना पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
इस्राइल ने योजना के अधिकतर हिस्सों को समर्थन, लेकिन सुरक्षा गारंटी और हमास को बाहर करने की शर्त पर जोर दे रहा है। वहीं फलस्तीनी पक्ष की ओर से मिली जुली प्रतिक्रिया है, लोग राहत और पुनर्निर्माण चाहते हैं, पर हमास और उसके समर्थक इसे कब्जे की वैधता मानते हैं। इस कड़ी में अरब देश- सऊदी अरब और यूएई जैसी ताकतें आर्थिक सहयोग पर सकारात्मक हैं, लेकिन फलस्तीनी राज्य की अस्पष्टता को लेकर संशय में है। जबकि रूस और चीन ने इस पहल का स्वागत किया है, पर अमेरिका-नेतृत्व वाली व्यवस्था पर सतर्कता जताई है। भारत और पाकिस्तान की बात करें तो भारत इस योजना को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अहम मानता है, वहीं पाकिस्तान फलस्तीन की राज्यसत्ता पर जोर दे रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय स्थिरीकरण बल की तैनाती
इस योजना के तहत, अमेरिका अरब और अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर एक अस्थायी अंतर्राष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (आईएसएफ) विकसित करेगा जिसे गाजा में तुरंत तैनात किया जाएगा। आईएसएफ, मिस्र और जॉर्डन के परामर्श से, जांच-परख वाले फलस्तीनी पुलिस बलों को प्रशिक्षण देगा। दीर्घकालिक आंतरिक सुरक्षा समाधान कहे जाने वाले आईएसएफ, इस्राइल और मिस्र के साथ सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा में मदद करेगा। आईएसएफ की तरफ से नियंत्रण स्थापित होते ही आईडीएफ इस क्षेत्र से हट जाएगा। यह वापसी विसैन्यीकरण से जुड़े मानकों, लक्ष्यों और समय-सीमाओं पर आधारित होगी, जिन पर आईडीएफ, आईएसएफ, गारंटर और अमेरिका के बीच सहमति होगी।
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शांति योजना में भारत के लिए क्या?
भारत के लिए, इस क्षेत्र में शांति, उसके प्रवासी समुदाय, उसके आर्थिक हितों और रणनीतिक जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है। बता दें कि इस्राइल में लगभग 18000 भारतीय हैं, ईरान में लगभग 5000-10000 और पूरे क्षेत्र में लगभग 90 लाख भारतीय हैं। पश्चिम एशिया भारत को उसकी 80 फीसदी तेल आपूर्ति प्रदान करता है। शांति योजना का ऊर्जा की कीमतों पर असर पड़ेगा। इसके अलावा, प्रमुख अरब देश भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेश करने के इच्छुक हैं; शांति से इन योजनाओं को भी बढ़ावा मिलेगा। हालांकि इसमें पाकिस्तान का भागीदार होना भारत के लिए अच्छी खबर नहीं हैं।
इस योजना से गाजा पर इस्राइल का युद्ध समाप्त हो जाएगा, जिसमें अक्तूबर 2023 में शुरू होने के बाद से कम से कम 66000 लोग मारे गए हैं और 168000 घायल हुए हैं। माना जाता है कि हजारों लोग मारे गए हैं और मलबे के नीचे फंसे हुए हैं। इस युद्ध ने फिलिस्तीन के गाजा पट्टी क्षेत्र को तबाह कर दिया है, हजारों लोगों की जान ले ली है, विस्थापित हुए हैं और नागरिकों को अकाल के खतरे में डाल दिया है। ट्रंप के प्रस्ताव पर सहमति बनते ही युद्ध तुरंत समाप्त हो जाएगा।