सात धनी देशों के समूह जी-7 की यहां मंगलवार को पूरी हुई शिखर बैठक पर यूक्रेन युद्ध, दुनिया भर में बढ़ी महंगाई, और चीन को लेकर उनकी चिंता का साया लगातार बना रहा। ये बात शिखर बैठक के बाद जारी हुए लंबे साझा बयान से भी सामने आई। लेकिन खाद्य संकट से दुनिया को राहत दिलाने के लिए जी-7 देशों ने जो घोषणा की, उसे विशेषज्ञों ने नाकाफी बताया है।
जी-7 देशों ने यूक्रेन को कई तरह की मदद देने का इरादा जताया है। इनमें वित्तीय, मानवीय, सैनिक और राजनयिक सहायता शामिल है। रूस की सैनिक और आर्थिक क्षमता को कैसे भोथरा बनाया जाए, इस बारे में भी इन धनी देशों ने खास रणनीति पर विचार किया।
रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण दुनिया भर में फैल रहा खाद्य और ईंधन संकट यहां इकट्ठा हुए नेताओं की खास चिंता का विषय रहा। खाद्य संकट से निपटने के लिए जी-7 ने ग्लोबल एलायंस फॉर फूड सिक्योरिटी को 4.5 बिलियन डॉलर की मदद देने का वादा किया है। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (डब्ल्यूएफपी) ने इस वादे का स्वागत किया है। लेकिन यह साफ है कि उसकी अपेक्षाएं पूरी नहीं हुई हैं। जी-7 शिखर बैठक से पहले डब्लूएफपी ने जी-7 नेताओं से आग्रह किया था कि वे इस वर्ष के लिए 22.2 बिलियन डॉलर की सहायता दें। डब्ल्यूएफपी ने अपनी एक ताजा रिपोर्ट में कहा है कि 45 देशों में लगभग पांच करोड़ लोग अकाल के कगार पर हैं, जबकि दुनिया में साढ़े 34 करोड़ लोग खाद्य असुरक्षा का शिकार हो गए हैं।
कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने खाद्य सुरक्षा मुहैया कराने के लिए जी-7 के 'नाकाफी' एलान की आलोचना की है। गैर-सरकारी संस्था ऑक्सफेम के विषमता नीति विभाग के प्रमुख मैक्स लॉसन ने कहा है- ‘इस समय की पीढ़ी भूख की सबसे गंभीर समस्या का सामना कर रही है। उसे देखते हुए यही कहा जा सकता है कि जो जरूरत है, उसके मुताबिक कदम उठाने में जी-7 देश नाकाम रहे हैं। नतीजतन, करोड़ों लोग भयानक भूख और भुखमरी का शिकार हो जाएंगे।’