कोरोना महामारी को ठीक से न संभाल पाने के कारण इस साल सुगा की लोकप्रियता काफी गिर गई। महामारी के बीच ओलिंपिक और पैराओलिंपिक खेल कराने की उनकी जिद को लेकर जनता में नाराजगी और बढ़ी। इसी कारण इस महीने के आरंभ में उन्होंने इस्तीफा देने का एलान किया। उधर कोरोना टीकाकरण का ठीक से संचालन करने के कारण तारो कोनो की देश में लोकप्रियता काफी बढ़ी। पिछले हफ्ते एलडीपी कार्यकर्ताओं के बीच कराए गए सर्वे में 46 फीसदी समर्थन कोनो को मिला था। किशिदा को सिर्फ 17 फीसदी कार्यकर्ताओं ने पसंद किया था।
कोनो अमेरिका में पढ़े-लिखे हैं। वे पहले रक्षा और विदेश मंत्री रह चुके हैं। पर्यवेक्षकों ने कहा था कि अपनी लोकप्रियता के कारण वे जनता में एलडीपी के लिए अधिक उत्साह जगाने में सफल होंगे। लेकिन नेता पद के चुनाव में उन्हें मात खानी पड़ी।
अब अगले सोमवार को डियेट (जापानी संसद) का विशेष सत्र होगा, जिसमें किशिदा को औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री नामजद किया जाएगा। उसके तुरंत बाद उन्हें चुनाव अभियान में उतरना होगा। ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने एक टिप्पणी में कहा है कि किशिदा के समय में जापान की आर्थिक नीति में कोई ज्यादा बदलाव होने की संभावना नहीं है। तारो कोनो ने अक्षय ऊर्जा को ज्यादा महत्व देने और नौकरशाही का शिकंजा कमजोर करने का वादा किया था। उन्होंने समलैंगिक विवाहों की अनुमति देने और विवाह के बाद पत्नी को अलग उपनाम अपनाने की आजादी देने का वादा भी किया था। किशिदा ने ऐसा कोई वादा नहीं किया है। बल्कि उन्होंने कहा है कि क्या समलैंगिक विवाहो की इजाजत दी जाए, इस बारे में वे किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं।