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Hamas Chiefs: मिसाइल हमले, विस्फोटक उपकरण छिपाने से गोलीबारी तक; इस्राइल ने हमास प्रमुखों को कैसे मारा?

Sat, 19 Oct 2024 02:32 PM IST
शिवेंद्र तिवारी स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

Hamas Chiefs Assassination: हाल ही में इस्राइली सेना ने हमास प्रमुख याह्या सिनवार को एक मुठभेड़ में मार गिराया। इससे पहले भी इस्राइल अलग-अलग तरीकों से हमास नेताओं को मार चुका है। समूह के दो प्रमुखों की मौत हेलीकॉप्टर मिसाइल हमले में हुई थी, जबकि एक नेता को उसके परिसर में विस्फोटक छिपाकर मारा गया।

 
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इस्राइल ने ऐसे हमास प्रमुखों को मारा - फोटो : AMAR UJALA
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विस्तार
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इस्राइल और हमास के बीच जारी जंग को एक साल से अधिक हो गया है। पिछले साल 7 अक्तूबर को हमास ने इस्राइल में घात लगाकर किया था जिसके बाद याजा युद्ध का मैदान बन गया। इस हमले के बाद इस्राइली सेना ने गाजा में अपने दुश्मनों को चुन-चुनकर मारना शुरू कर दिया। हाल ही में इस्राइल रक्षा बल (आईडीएफ) ने एक मुठभेड़ में गाजा में अपने सबसे बड़े दुश्मन और हमास के मुखिया याह्या सिनवार को मार गिराया। 
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इसी साल जुलाई के आखिर में हमास के तत्कालीन प्रमुख इस्माइल हानिया की ईरान में हत्या कर दी गई थी। करीब ढाई महीने के अंदर इस्राइल ने हमास के नए प्रमुख सिनवार को भी मार गिराया। पहले भी हमास प्रमुखों को इस्राइली सेना ने ऐसे ही निशाना बनाया था। 

आइये जानते हैं कि हमास क्या है और कब बना? कब-कौन संगठन का प्रमुख बना? इनके नेताओं का क्या हुआ? इस्माइल हानिया को इस्राइल ने कैसे मारा था? अब याह्या सिनवार कैसे मारा गया?
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पहले जानते हैं कि हमास क्या है और कब इसकी स्थापना हुई?
हमास की उत्पत्ति से पहले हमें फलस्तीन के मौजूदा सत्ताधारी गठबंधन पलेस्टाइन लिबरेशन आर्गेनाइजेशन (पीएलओ) को समझना चाहिए। पीएलओ की कल्पना 1964 में मिस्र के काहिरा में अरब लीग शिखर सम्मेलन में की गई थी। फलस्तीनी नेता यासिर अराफात 1969 में पीएलओ के अध्यक्ष बने। पीएलओ ने अपने चार्टर में ही फलस्तीन की मुक्ति के लिए इस्राइल को खत्म करने की घोषणा कर दी। हालांकि, इस्राइल और पीएलओ की शांति के लिए 1993 में हुए ओस्लो समझौते के बाद यह अनुच्छेद हटा दिया गया। इसके साथ ही पीएलओ ने इस्राइल को यहूदी देश के रूप में मान्यता दे दी।

इसी तरह 1980 और 1990 के दशक के अंत में इस्राइली सरकार ने पीएलओ पर लगाए प्रतिबंध हटा लिए। 13 सितंबर 1993 को अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की मध्यस्थता में पीएलओ-इस्राइली समझौता हुआ। इसके साथ ही इस्राइल ने पीएलओ को मान्यता दे दी। 

उधर पीएलओ के प्रतिद्वंद्वी हमास का जन्म हो चुका था। हमास की उत्पत्ति इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन यानी 'इंतिफादा' विद्रोह के दौरान 1987 में हुई। इसे ईरान का समर्थन मिला था, जिसकी विचारधारा मिस्र के मुस्लिम ब्रदरहुड की इस्लामी विचारधारा से मेल खाती थी। 

हमास की स्थापना मजहबी नेता शेख अहमद यासीन ने की थी। साल 1987 में यासीन ने इस्राइल के खिलाफ पहले इंतिफादा की घोषणा की थी। इंतिफादा आमतौर पर 'बगावत' या 'विद्रोह' को कहा जाता है। 1988 में हमास ने कहा था कि इसकी स्थापना फलस्तीन की मुक्ति के लिए हुई है।
 

हमास के पूर्व नेता शेख अहमद इस्माइल यासीन और इस्माइल हानिया - फोटो : AMAR UJALA
कैसे बना था हमास?
दरअसल, जून 1967 के अरब-इस्राइल युद्ध के इस्राइल का गाजा पर कब्जा हो गया। उधर गाजा ने मुजामा अल-इस्लामिया नाम के संगठन को संरक्षण दिया, जिसे फलस्तीनी मौलवी शेख अहमद यासीन ने बनाया था। तब इस्राइल ने मुजामा अल-इस्लामिया को एक ऐसा संगठन माना जो फलस्तीनी समुदाय के लिए दान और कल्याण कार्यों में शामिल रहता है और इससे उसे कोई खतरा नहीं है। दिसंबर 1987 में इस्लामी विद्रोह यानी इंतिफादा-I के शुरू होने से पहले मुजामा अल-इस्लामिया ही हमास बन गया। 

इस्राइल ने माना कि पीएलओ की तुलना में मुजामा अल-इस्लामिया और उससे उपजा संगठन हमास कम खतरनाक है। इस्राइल ने सोचा कि फलस्तीनियों को विभाजित करने से यहूदी राष्ट्र के हित में मदद मिलेगी। जहां इस्राइल ने पीएलओ को आतंकी संगठन और अपने हितों के लिए बड़ा खतरा बताया, तो हमास भी पीएलओ के धर्मनिरपेक्ष और राष्ट्रवादी दृष्टिकोण के कारण उसके खिलाफ था। 

इस्राइल ने शेख अहमद यासीन नाम के इस अपाहिज मौलवी का साथ दिया जब वह हमास बनने की नींव रख रहा था। इस्राइल ने गाजा के इस्लामिक विश्वविद्यालय की स्थापना का भी समर्थन किया, जिसे अब वह उग्रवाद का केंद्र मानता है। इस तरह से हमास और इस्राइल दोनों को पीएलओ के खिलाफ स्वाभाविक सहयोगी के रूप में देखा जाने लगा। हालांकि, 1988 में हुई एक घटना ने पूरी तस्वीर बदल दी। दरअसल, हमास ने 1988 में गाजा में दो इस्राइली रक्षा बल (आईडीएफ) कर्मियों की हत्या कर दी। घटना के बाद से इस्राइल हमास के खिलाफ हो गया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।  

इस्राइल-हमास युद्ध - फोटो : AMAR UJALA
हमास को चलाता कौन है?
हमास के पास कई नेतृत्व निकाय हैं जिसमें राजनीतिक और सैन्य मोर्चा हैं। पूरे संगठन में अहम निर्णय जिम्मेदारी 15 सदस्यीय पोलित ब्यूरो के पास होती है जिसे हमास की राजनीतिक शाखा के रूप में जाना जाता है। शूरा परिषद पोलित ब्यूरो का चुनाव करती है। यह मोर्चा निर्वासन में काम करता है। स्थानीय समितियां गाजा और वेस्ट बैंक में जमीनी मुद्दों का प्रबंधन करती हैं।



 

कब किसने हमास का नेतृत्व किया और उनका क्या हुआ?
फलस्तीनी राजनेता और इमाम शेख अहमद इस्माइल हसन यासीन ने हमास की सह-स्थापना की। दिसंबर 1987 में हमास की स्थापना से लेकर मार्च 2004 में तक करीब 16 साल हमास प्रमुख की जिम्मेदारी हसन यासीन पर थी। 

इस्राइल ने हमास के सह-संस्थापक अहमद यासीन को 22 मार्च 2004 को हेलीकॉप्टर मिसाइल हमले में मार गिराया था, जब वे गाजा शहर में एक मस्जिद से बाहर निकल रहे थे। इस्राइल ने 2003 में शेख अहमद उस समय मारने का प्रयास किया था, जब वे गाजा में हमास के एक सदस्य के घर पर थे।

हेलीकॉप्टर मिसाइल हमले में रंतिसी की मौत
अहमद यासीन के बाद हमास का नेतृत्व अब्देल-अजीज अल-रंतिसी ने किया। रंतिसी एक फलस्तीनी नेता और 1987 में शेख अहमद यासीन के साथ हमास के सह-संस्थापक था। रंतिसी ने मार्च 2004 से अप्रैल 2004 तक हमास शूरा परिषद के अध्यक्ष और हमास शूरा परिषद के पहले उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।

17 अप्रैल 2004 को गाजा शहर में एक कार पर इस्राइली हेलीकॉप्टर मिसाइल हमले में हमास नेता अब्देल-अजीज अल-रंतिसी की मौत हो गई। दो अंगरक्षक भी मारे गए। रंतिसी की हत्या, शेख अहमद यासीन की हत्या के बाद गाजा में हमास नेता के रूप में पदभार संभालने के कुछ ही समय बाद हुई।
 

जॉर्डन में मेशाल को जहर का इंजेक्शन देकर मारने की कोशिश
अप्रैल 2004 में रंतिसी की मौत के बाद हमास के नेतृत्व की जिम्मेदारी खालिद मेशाल को मिली। मेशाल हमास के संस्थापक सदस्यों में शामिल है और 1996 से 2017 तक यह हमास की राजनीतिक शाखा का प्रमुख रहा है। हमास नेता खालिद मेशाल 1997 में दुनिया भर में तब चर्चा में आया था जब इस्राइली एजेंटों ने जॉर्डन की राजधानी अम्मान में उसके दफ्तर के बाहर सड़क पर मेशाल को जहर का इंजेक्शन दे दिया था। हालांकि, हमास नेता मेशाल हत्या के प्रयास में जिंदा बच गया। 2017 में खालिद मेशाल की जगह इस्माइल हनिया ने ले ली थी। खालिद मेशाल अभी भी हमास के जीवित बचे चेहरों में सबसे प्रमुख है जिसके एक बार फिर हमास नेता बनने की चर्चा है।

इस्माइल हानिया की ईरान में हत्या की गई थी - फोटो : AMAR UJALA
ईरान में हानिया की हत्या, परिसर में विस्फोटक छिपाकर मारा
हमास ने 2017 में मेशाल को हटाकर इस्माइल हानिया को हमास की राजनीतिक शाखा 'इस्लामिक प्रतिरोध आंदोलन हमास' का प्रमुख बना दिया। दरअसल, 2006 में फलस्तीनी संसदीय चुनाव हुए थे जिसमें जीत के बाद गाजा इलाके पर हमास का कब्जा हो गया। आखिरी बार वहां चुनाव उसी समय हुए थे। हमास का 2007 से गाजा पट्टी पर शासन है। आम चुनावों में हमास की जीत के बाद से ही संगठन में हानिया का दबदबा बढ़ने लगा था। उसे गाजा पट्टी में फलस्तीनी प्राधिकरण का प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। इस दौरान मिस्र से गाजा पट्टी में आयातित वस्तुओं पर भारी कर लगाकर हानिया ने अपनी संपत्ति कई गुना बढ़ा ली।

इस्माइल हानिया कतर में रह रहा था और वहां वह ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहा था। इस्राइल पर हुए 7 अक्तूबर के हमले को उसने अपने दफ्तर में टीवी पर देखा था। इस्राइल पर बीते साल 7 अक्तूबर को हुए हमले के पीछे भी इस्माइल हानिया की अहम भूमिका थी और यही वजह थी कि इस्माइल हानिया इस्राइली सुरक्षा बलों के निशाने पर था। इसी साल जुलाई के आखिर में इस्माइल हानिया ईरान के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए तेहरान पहुंचा था। 31 जुलाई को तड़के तेहरान में हानिया की हत्या कर दी गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान में इस्माइल हानिया जिस भारी सुरक्षा वाले परिसर में रहता था, वहां एक विस्फोटक उपकरण छिपाकर रखा गया था, जिससे उसकी मौत हो गई।
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याह्या सिनवार - फोटो : AMAR UJALA
अभी हमास नेता का क्या हुआ है?
इस्माइल हानिया के मारे जाने के बाद 6 अगस्त को हमास ने याह्या सिनवार को अपना प्रमुख चुना था। याह्या सिनवार गाजा पट्टी में हमास का शीर्ष नेता था। इस्राइल में 7 अक्तूबर को हुए हमास के हमले का मास्टरमाइंड भी याह्या सिनवार को माना जाता है। याह्या सिनवार को गाजा का सबसे ताकतवर नेता माना जाता था। वह इस्राइल की कैद में भी रहा था और करीब 24 साल जेल में बिता चुका था। इस्राइली सैनिक गिलाद शालित के बदले में इस्राइल की जेल से 1027 फलस्तीनी कैदी रिहा किए गए थे, उन्हीं कैदियों में याह्या सिनवार भी शामिल था। सिनवार ईरान का करीबी था और हमास के कट्टरपंथी समूह का नेतृत्व करता था। याह्या सिनवार इस्राइल की उस सूची में शीर्ष पर था, जिनका इस्राइल खात्मा करना चाहता था।

हमास प्रमुख सिनवार को 16 अक्तूबर को एक मुठभेड़ में मार गिराया गया। इस्राइली अधिकारियों ने कहा कि हमास नेता को उस समय मार दिया गया जब वह भूमिगत सुरंग से निकलकर सुरक्षित जगह पर भागने की कोशिश कर रहा था। आईडीएफ ने कहा कि उसे दक्षिणी गाजा के ताल अल सुल्तान क्षेत्र में तलाशी ले रहे पैदल सैनिकों ने खोजा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, सिनवार की मौत सिर में गोली लगने से हुई थी। हमास नेता को टैंक के गोले से लगी चोटों सहित अन्य चोटें भी लगी थीं। 
 
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