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भूख से लेकर भयावहता तक: अफगानिस्तान में बदहाली चरम पर, लोग जीवित रहने के लिए बेच रहे अपने बच्चें

Wed, 20 May 2026 04:43 PM IST
Asmita Tripathi आईएएनएस, नई दिल्ली

सार

अफगानिस्तान में बदहाली चरम पर हैं। यहां पर लोग जिंदा रहने के लिए अपने बच्चों को बेच रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार तीन-चौथाई अफगानी अब बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में नाकाम हैं। पढ़ें पूरी खबर
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बच्चों को बेच रहे अफगानी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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भूख, गरीबी और बदहाल हालातों से जूझ रहे अफगानिस्तान में मानवीय संकट लगातार गहराता जा रहा है। इसके बारे में बीबीसी सहित कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में अफगानिस्तान में गहराते मानवीय संकट का जिक्र किया गया है। मीडिया  रिपोर्ट के अनुसार अफगानिस्तान में  कथित तौर पर गरीब परिवार अपने  भोजन, चिकित्सा उपचार या कर्ज से राहत पाने के लिए अपने बच्चों को बेचने के लिए मजबूर है।

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बुनियादी जरूरतों पूरा करने में संर्घष

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रिपोर्टों से पता चलता है कि इस तरह की घटनाएं अब अलग-थलग मामले नहीं हैं, बल्कि एक व्यापक संकट का हिस्सा हैं, जिसमें तीन-चौथाई अफगानी अब बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं। अफगानिस्तान में बिगड़ते मानवीय संकट ने परिवारों को जीवित रहने के लिए अपने बच्चों, अक्सर बेटियों, को बेचने जैसे अकल्पनीय कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। मीडिया रिपोर्टों में गरीबी, भूख, बेरोजगारी और अंतरराष्ट्रीय सहायता में कटौती को मुख्य कारण बताया गया है। इसके साथ ही तालिबान की ओर से महिलाओं और लड़कियों पर लगाए गए प्रतिबंधों ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया है।

इलाज के लिए बेटी को बेचा
इस सप्ताह बीबीसी की घोर प्रांत से आई रिपोर्ट में दिखाया गया कि भीषण भूख और बेरोजगारी से व्याकुल कई परिवार अपनी बेटियों को बेचने पर मजबूर हो गए हैं। एक पिता, सईद अहमद ने बताया कि उन्हें अपनी पांच वर्षीय बेटी शाइका को लीवर सिस्ट और अपेंडिक्स की जान बचाने वाली सर्जरी के लिए बेचना पड़ा। उनकी शर्त यह थी कि खरीदार उसे तभी ले जा सकता था जब आवश्यक चिकित्सा उपचार पूरा हो जाए। शाइका की सर्जरी सफल रही। सर्जरी का खर्च 200,000 अफगानी (लगभग 3,200 अमेरिकी डॉलर से कम) में मिली रकम से पूरा किया गया।

बच्चों की मृत्यु दर बढ़ रही

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रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि चार में से तीन अफगान अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा नहीं कर सकते है। आपातकालीन स्तर की भुखमरी लगभग पांच मिलियन लोगों को प्रभावित कर रही है। वहीं, कुपोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के ध्वस्त होने के कारण बच्चों की मृत्यु दर बढ़ रही है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि बेरोजगारी चरमराई हुई है। स्वास्थ्य सेवाएं संघर्ष कर रही हैं। लाखों लोगों को बुनियादी जरूरतें मुहैया कराने वाली सहायता अब घटकर नाममात्र की रह गई है। समाचार नेटवर्क ने पाया कि घोर में परिवार भूख और बेरोजगारी से निपटने के लिए बच्चों को बेच रहे हैं।

 

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बच्चों को बेचना ही एकमात्र उपाय
संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार अफगानिस्तान में चार में से तीन लोग अपनी बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं कर पाते हैं। माता-पिता भुखमरी से बचने के लिए बच्चों को बेचने को ही एकमात्र उपाय बताते हैं। एक व्याकुल पिता ने अपनी सात वर्षीय जुड़वां बेटियों, रोकिया और रोहिला का परिचय कराते हुए ब्रिटिश सार्वजनिक प्रसारक को बताया कि वह अपनी बेटियों को भी बेचने को तैयार है क्योंकि वह बेहद गरीब, कर्ज में डूबा हुआ और असहाय है।

 

दूसरे बच्चे भूख से मर रहे थे, इसलिए बेचा
पहले की रिपोर्टों में ऐसे माता-पिता के बयान दर्ज किए गए हैं, जिन्होंने कहा कि उन्होंने अपने बच्चों को इसलिए बेचा क्योंकि 'दूसरे बच्चे भूख से मर रहे थे', जिससे यह एक घटना नहीं बल्कि एक नियमित प्रक्रिया के रूप में सामने आया। 2022 में वीओए के एक कार्यक्रम 'अफगानिस्तान में एक बच्चे को दूसरे से बचाने के लिए बेचना' में उसी वर्ष सूखे से प्रभावित क्षेत्रों में माता-पिता द्वारा परिवार के बाकी सदस्यों को भूख से बचाने के लिए एक बच्चे को बेचने की घटना को दर्शाया गया था, जो ग्रामीण क्षेत्रों में जीवनयापन के लिए आवश्यक गणित को रेखांकित करता है।

अफगानिस्तान में बाल तस्करी
उसी वर्ष, ब्रिटेन के आईटीवी न्यूज ने रिपोर्ट किया कि 'भूखमरी से बेहाल परिवार अपने ही बच्चों को बेचने पर मजबूर हो रहे हैं'। अस्पतालों में दवाइयों और भोजन की कमी के कारण मर रहे कमजोर शिशुओं के फुटेज दिखाए। इसमें एक मां को स्थानीय बाजार में अपने बच्चों को बिक्री के सामान की तरह रखे हुए दिखाया गया। जर्मनी के डॉयचे वेले (डीडब्ल्यू) ने 'अफगानिस्तान में बाल तस्करी' नामक एक विशेष रिपोर्ट प्रसारित की, जिसमें यह दस्तावेजीकरण किया गया कि कैसे ग्रामीण प्रांतों में आंतरिक रूप से विस्थापित परिवारों को बाल-विक्रय नेटवर्क में धकेल दिया जाता है, जो अक्सर दलालों या रिश्तेदारों द्वारा संचालित होते हैं।

ऑस्ट्रेलिया के एसबीएस न्यूज ने 2021 में एक अफगान मां के बारे में रिपोर्ट किया था, जिसने अपने परिवार के बाकी सदस्यों को भुखमरी से बचाने के लिए अपने नवजात जुड़वा बच्चों में से एक को एक निःसंतान दंपति को बेच दिया था। यह मामला देश में मानवीय व्यवस्था के पतन के प्रतीक के रूप में विश्व स्तर पर वायरल हो गया था।

80 प्रतिशत से अधिक अफगान परिवार कर्ज में डूबे
बीबीसी और अन्य द्वारा उद्धृत संयुक्त राष्ट्र और अन्य गैर-सरकारी संगठनों के आंकड़ों से पता चलता है कि 80 प्रतिशत से अधिक अफगान परिवार कर्ज में डूबे हुए हैं। वहीं, बेरोजगारी, जलवायु संबंधी सूखे और विदेशी सहायता पर निर्भर अर्थव्यवस्था के पतन ने 23-30 मिलियन लोगों को गंभीर खाद्य असुरक्षा में डाल दिया है। टिप्पणीकारों का कहना है कि तालिबान की सत्ता में वापसी और अधिकांश अंतरराष्ट्रीय सहायता के निलंबन के बाद से संकट और गहरा गया है, जिससे ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जहां अत्यंत गरीबी अब आबादी के विशाल हिस्से के लिए एक सामान्य बात बन गई है, न कि कोई अपवाद है।

संयुक्त राष्ट्र की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है, 'अनुमानों से पता चलता है कि 2025 में अफगानिस्तान में लगभग 28 मिलियन लोग गरीबी में जी रहे होंगे। वहीं, बड़े पैमाने पर जनसंख्या की वापसी, बिगड़ते सूखे और घटती अंतरराष्ट्रीय सहायता ने स्थिति को और भी खराब कर दिया है।' इसमें आगे कहा गया है कि अफगानिस्तान ने लगातार दूसरे वर्ष आर्थिक विकास दर्ज किया, लेकिन 2025 में वास्तविक जीडीपी में केवल 1.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो पिछले वर्ष के 2.3 प्रतिशत से कम है। हालांकि, जनसंख्या वृद्धि 6.5 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिसके परिणामस्वरूप प्रति व्यक्ति वास्तविक जीडीपी में अनुमानित 2.1 प्रतिशत की गिरावट आई है। 

 

 

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