रूस और यूक्रेन की अपनी यात्रा के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने दावा किया है कि वे मौजूदा यूक्रेन संकट को हल करने की दिशा में आगे बढ़े हैं। मास्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत के बाद उन्होंने कहा था कि पुतिन ने उनसे तनाव और ना बढ़ाने का वादा किया है। लेकिन अमेरिकी और कुछ यूरोपीय विशेषज्ञों का कहना है कि मैक्रों जिस सहमति पर भरोसा कर रहे हैं, वह अस्पष्ट है। उन्होंने ध्यान दिलाया है कि सात साल पहले रूस और यूक्रेन के बीच जो युद्धविराम का समझौता हुआ था, मैक्रों उस पर अमल की राह निकालने की कोशिश में हैं। जबकि वह समझौता अब तक बेअसर साबित हुआ है।
आलोचकों का कहना है कि मिन्स्क समझौते में सबसे बड़ी खामी यह थी कि पहला कदम कौन उठाएगा, इसका उल्लेख उसमें नहीं किया गया। इसके लिए आगे बातचीत होनी थी। लेकिन युद्धविराम कायम नहीं रहा। उधर रूस ने भी यूक्रेन सीमा पर फिर से अपनी फौज तैनात कर दी। मिन्स्क वार्ता में अमेरिका की तरफ से विशेष प्रतिनिधि कुर्ट वोल्कर शामिल हुए थे। अब उन्होंने अमेरिकी न्यूज वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से कहा है कि मिन्स्क में हुए समझौतों में गहरी खामियां थीं।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमीर जेलेंस्की के एक निकट सूत्र ने एक्सियोस.कॉम से बातचीत में दावा किया कि यूक्रेन मिन्स्क समझौते पर अमल के लिए वचनबद्ध है। लेकिन रूस उस पर अमल नहीं कर रहा है। सूत्र ने कहा- ‘सबसे बुरी बात यह है कि रूस यूक्रेन में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है।’ जबकि रूस का कहना है कि यूक्रेन ने दोनबास इलाके को विशेष दर्जा देने का अपना वादा पूरा नहीं किया है। इसके बदले उसने वहां असंतुष्ट समूहों के खिलाफ सैनिक कार्रवाई जारी रखी है।
पश्चिमी विश्लेषकों का कहना है कि गुजरे सात साल में यूक्रेन की राजनीतिक सूरत पूरी तरह से बदल गई है। इस बीच रूस ने दोनबास इलाके में रहने वाले 50 हजार से ज्यादा लोगों को अपने पासपोर्ट जारी कर दिए हैं। इसके पीछे मकसद उस क्षेत्र पर अपना दावा मजबूत करना है।