अमेरिका की एक संघीय अदालत ने देश में चल रही तकनीकी-सहायता से चल रही एक धोखाधड़ी योजना को स्थायी रूप से बंद करने का आदेश दिया है।
इस योजना का मास्टरमाइंड एक अमेरिकी नागरिक है और यह भारत के कॉल सेंटरों से संचालित होती रही है। इस योजना के शिकार कई अमेरिकी और सैकड़ों बुजुर्ग हुए हैं। कुछ मामलों में धोखाधड़ी करने वालों ने माइक्रोसॉफ्ट की आड़ भी ली।
अमेरिकी न्याय मंत्रालय ने बताया कि अदालत ने माइकल ब्रायन कॉटर (59) और कैलिफोर्निया की चार कंपनियों के खिलाफ स्थाई रोक का आदेश दिया और उनके टेलीमार्केटिंग और वेब साइटों के माध्यम से तकनीकी सहायता देने की पर भी रोक लगा दी है।
इसके तहत सिंगापुर में पंजीकृत डिजिटल कंसीयज, नेवादा में पंजीकृत सेंसी वेंचर्स कंपनी और एनईई इंक के खिलाफ भी निषेधाज्ञा आदेश जारी किया। अमेरिकी अधिकारियों और भारत के केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के संयुक्त अभियान के बाद ऐसा किया गया। इस योजना के चलते अमेरिका को हजारों डॉलर का नुक सान होता रहा है।
मंत्रालय ने अक्तूबर में कोटर और कंपनियों के खिलाफ मियामी व फ्लोरिडा में अदालत के समक्ष अनुरोध किया था, और एक अस्थायी रोक लगाने का आदेश तुरंत दिया गया। अब इसे स्थायी बना दिया गया है।
भारत के प्रति आभार जताया
अमेरिका के कार्यवाहक सहायक अटॉर्नी जनरल जेफरी बॉसर्ट क्लार्क ने भारत के सहयोग की सराहना की है। उन्होंने कहा, तकनीकी-समर्थित धोखाधड़ी योजनाओं और विदेशों में बनी अन्य योजनाओं की जांच करने, मुकदमा चलाने में भारत की सीबीआई सहित विदेशी कानून प्रवर्तन के सहयोग के लिए विभाग आभारी है। शिकायत में कहा गया कि कोटर ने कथित तौर पर भारत में साजिशकर्ताओं के साथ काम किया।
इस तरह ऐंठी गई रकम
इस धोखाधड़ी के तहत पॉप-अप संदेश देकर दावा किया जाता था कि उपभोक्ता का कंप्यूटर वायरस संक्रमित है। इसके बाद उपभोक्ता को स्कैन चलाने के लिए कहा जाता और मालवेयर की पुष्टि की जाती थी।
इसके बाद मदद के लिए एक टोल-फ्री नंबर दिया जाता था। पीड़ितों ने जब इस नंबर पर फोन किया तो वे धोखाधड़ी योजना में भारत स्थित कॉल सेंटर से जुड़े पाए गए। कॉल सेंटर पीड़ित उपभोक्ता से कंप्यूटर की रिमोट एक्सेस मांगकर सैकड़ों डॉलर भुगतान के लिए कहते थे। पीड़ितों की शिकायत पर पता चला कि योजना संचालित करने वालों ने भारत में सह-साजिशकर्ताओं के साथ काम किया।