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इस्लामी जगत के साथ विवाद में ‘दब्बू’ नहीं बनेगा फ्रांस : मैक्रों

Sat, 31 Oct 2020 02:36 AM IST
Jeet Kumar राम यादव, बॉन।
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इमैनुएल मैक्रों
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दुनियाभर के इस्लामी देशों में विरोध झेल रहे फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने नीस में हुए आतंकी हमले पर कहा कि उनका देश इस्लामी जगत के साथ विवाद में ‘दब्बू’ नहीं बनेगा। देश के तटवर्ती नगर नीस के नोत्रे दाम चर्च के सामने खड़े होकर उन्होंने यह बात कही। इसी चर्च में एक आतंकी ने दो महिलाओं समेत तीन लोगों को चाकू से मार डाला था और छह लोगों को घायल कर दिया था।

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मैक्रों ने कहा, बिल्कुल साफ है कि फ्रांस हमले का निशाना है। सारा फ्रांस कैथोलिकों के साथ है, ताकि वे हमारे देश में पूरी आजादी के साथ अपने धर्म का पालन कर सकें। ताकि हर धर्म का पालन हो सके।


राष्ट्रपति ने घोषणा की कि उनका देश इस्लामी जगत के साथ विवाद में दब्बू नहीं बनेगा। देश के स्कूलों और धार्मिक स्थानों की सुरक्षा करने वाले सैनिकों की संख्या तीन हजार से बढ़ा कर सात हजार कर दी जायेगी।
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वहीं, फ्रांस के प्रधानमंत्री जौं कास्तेक्स ने इस घटना पर कहा, शिक्षक सामुएल पाती पर हमले द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर निशाना साधा गया था। नीस में हुए हमले द्वारा अब धर्मपालन की स्वतंत्रता को निशाना बनाया गया है। 

अविनों में टला हादसा
बृहस्पतिवार को ही दक्षिणी फ्रांस के अविनों से भी एक और ऐसी ही खबर सुनने में आई। वहां हथियारबंद आततायी कुछ कर पाता, इससे पहले ही पुलिस की गोली का शिकार हो गया। लियों नाम के शहर में पुलिस ने चाकू लिए एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया।

यह भी सुनने में आया कि सऊदी अरब के जेद्दा शहर में स्थित फ्रांसीसी वाणिज्य दूतावास के बाहर एक सुरक्षाकर्मी को चाकू से घायल कर दिया गया।

फिर लॉकडाउन
दक्षिणी फ्रांस के तटवर्ती नगर नीस के चर्च में बृहस्पतिवार को आतंकी ने न केवल ‘नोत्रे दाम’ चर्च को चुना, बल्कि ठीक उस दिन यह हत्याकांड रचा, जब अनेक इस्लामी देशों में पैगंबर मोहम्मद का जन्मदिन मनाया जा रहा था। फ्रांस में बहुत से लोग इसे संयोग के बदले अपने धर्म के विरुद्ध युद्ध का सुविचारित उद्घोष मान रहे हैं।

फ्रांस की जनता के लिए यह घटना असह्य दोहरी मार के रूप में आयी है। कोरोना की दूसरी भीषण लहर के कारण बृहस्पतिवार की आधी रात से वहां एक बार फिर देशव्यापी लॉकडाउन लागू हो गया है। स्कूल, कार्यालय, अत्यावश्यक वस्तुओं की दुकानें तथा कारखाने तो खुले रहेंगे, पर बाकी सब कुछ बंद रहेगा। रात में कर्फ्यू रहेगा। 

दो महीने में तीसरी घटना
वास्तव में केवल दो महीनों के भीतर निर्दोष साधारण लोगों पर चाकू से आतंकवादी हमलों की यह तीसरी घटना है। सितंबर में एक पाकिस्तानी शरणार्थी ने पेरिस स्थित व्यंग पत्रिका ‘चार्ली एब्दो’ के पुराने कार्यालय के पास चाकू से हमले में दो लोगों को घायल कर दिया था।

16 अक्टूबर को पेरिस के पास एक उपनगर के स्कूली शिक्षक सामुएल पाती का सिर काटने वाला हत्यारा भी शरणार्थी था, जो रूस के चेचन्या से आया था। नीस का आतंकी भी 21 साल का एक ट्यूनीशियाई शरणर्थी बताया जा रहा है।

आश्चर्य नहीं कि मुस्लिम देशों के जिन शरणार्थियों का कुछ साल पहले तक यूरोप के देशों की जनता स्वागत किया करती थी, उनसे अब अपना पिंड छुड़ाना चाहती है।

बांग्लादेश में फिर प्रदर्शन
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में शुक्रवार को भी हजारों मुस्लिमों ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों द्वारा धर्मनिरपेक्ष कानूनों का समर्थन किए जाने के खिलाफ प्रदर्शन किया। इन कानूनों के तहत पैगंबर के कार्टूनों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत सही ठहराया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ढाका की गलियों में प्रदर्शनकारी फ्रांस के उत्पादों का बहिष्कार करो के नारे लगाते सुने गए। 

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