फ्रांस में 10 अप्रैल को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रचार की औपचारिक शुरुआत एक तीखे विवाद के साथ हुई है। औपचारिक चुनाव प्रचार शुरू होने से एक दिन पहले रविवार को धुर दक्षिणपंथी नेता एरिक जिमो की एक रैली में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को हत्यारा बताने वाले नारे लगाए गए। इस नारे पर जिमो ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया। मैक्रों ने इसके लिए उनकी कड़ी निंदा की है। जबकि जिमो ने कहा है कि उन्होंने ऐसा कोई नारा नहीं सुना।
मैक्रों और दूसरे प्रत्याशियों ने अपने चुनाव प्रचार की औपचारिक शुरुआत सोमवार को की। चुनाव मैदान में कुल 12 उम्मीदवार हैं। फ्रांस के कानून के मुताबिक इस बात को सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार की औपचारिक अवधि के दौरान मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने का समान मौका मिले। वैसे कई उम्मीदवार महीनों से चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं।
औपचारिक चुनाव प्रचार शुरू होने के मौके पर जारी चुनाव पूर्व जनमत सर्वेक्षण में मैक्रों को बाकी उम्मीदवारों से काफी आगे दिखाया गया है। इसके मुताबिक उन्हें 28 फीसदी मतदाताओं का समर्थन मिल रहा है। 21 फीसदी समर्थन के साथ धुर दक्षिणपंथी उम्मीदवार मेरी ली पेन दूसरे नंबर पर हैं। तीसरे स्थान पर वामपंथी उम्मीदवार ज्यां लुक मेलेनशों हैं, जिन्हें 14 फीसदी मतदाताओं का समर्थन है। प्रेसकी को 11 और जिमो को 10 फीसदी मतदाताओं का समर्थन बताया गया है।
फ्रांस के चुनाव नियम के मुताबिक अगले पहले दौर के मतदान में किसी उम्मीदवार को 50 फीसदी से ज्यादा वोट नहीं मिले, तो सबसे ऊपर रहने वाले दो उम्मीदवारों के बीच दूसरे दौर के मतदान में मुकाबला होगा। यह मतदान 24 अप्रैल को होगा। फिलहाल, यह संभावना जताई गई है कि पांच साल पहले की तरह ही दूसरे दौर में मैक्रों और ली पेन आमने-सामने होंगे। लेकिन कुछ चुनाव विशेषज्ञों की राय है कि अभी इस बारे में कोई निश्चित अनुमान लगाना मुश्किल है। पेरिस स्थित थिंक टैंक फोंदापोल के प्रमुख डोमनिक रेयनी ने ब्रिटिश अखबार द गार्जियन से कहा कि मतदान में अभी लगभग दो हफ्ते बाकी हैं। इतने में समय में कुछ भी हो सकता है।