ईरान और इस्राइल के बीच संघर्ष विराम की कोशिशें शुरू हो गई हैं। यूरोप के देशों द्वारा इसे लेकर एक प्रस्ताव तैयार किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस प्रस्ताव का खुलासा किया है, जिसके अनुसार, ईरान को यूरेनियम संवर्धन का काम रोकना होगा। साथ ही ईरान को अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को रोकना होगा और पूरे पश्चिम एशिया में सक्रिय उग्रवादी संगठनों को भी अपना समर्थन देना बंद करना होगा।
जिनेवा में हुई विदेश मंत्रियों की मुलाकात
ईरान ने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर किए हुए हैं और ईरान यूरेनियम संवर्धन को अपना अधिकार बताता है। ईरान का कहना है कि उसका यूरेनियम संवर्धन करना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वैध है। लेकिन बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव और खासकर इस्राइल के ताजा हमलों के बाद ईरान पर परमाणु समझौता करने का दबाव बढ़ गया है। शुक्रवार को ईरान और इस्राइल के बीच संघर्ष विराम के लिए फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन के विदेश मंत्रियों ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से जिनेवा में मुलाकात की। इस्राइल-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद पश्चिमी राजनयिकों की ईरान के मंत्री के साथ पहली मुलाकात है।
हाल ही में अराघची ने इससे पहले अमेरिका के पश्चिम एशिया में विशेष प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ से भी फोन पर बात की। इस बातचीत में अराघची ने विटकॉफ से साफ कहा कि जब तक उन पर हमले जारी रहेंगे, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी। इस बीच यूरोप के राजनयिक भी अमेरिका के साथ संपर्क में हैं। ब्रिटिश विदेश मंत्री ने इस सप्ताह की शुरुआत में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की।
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ईरान का यूरेनियम संवर्धन छोड़ने से इनकार
अमेरिका ने ईरान के यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह से रोकने की मांग की है, इसके बजाय एक नागरिक परमाणु कार्यक्रम की पेशकश की है जो बहुराष्ट्रीय स्रोत से आयातित ईंधन पर निर्भर करेगा। हालांकि ईरान ने यूरेनियम संवर्धन को छोड़ने से इनकार कर दिया है। 2000 के दशक की शुरुआत में, पेरिस समझौते के तहत, तेहरान स्वैच्छिक तौर पर संवर्धन को अस्थायी रूप से निलंबित करने पर सहमत हुआ था।